अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

नमस्कार , आज आपका ध्यान मै कुछ ऐसी बातो पर ले जाना चाहता हु जो कि आप सब को पता है पर शायद ध्यान नहीं दिया होगा कभी आपने उस तरफ ,
अब मै ये कैसे कह रहा हु कि आपने ध्यान नहीं दिया होगा , इसीलिए कि अगर ध्यान दिया होता तो अब तक एक दो पोस्ट जाती उस पर .

बात है गानों की पुराने फिल्म के गाने और नयी फिल्म के गानों की एक झलकी .
पहले पुराने फिल्म का एक गाना -
सातो जनम मै तेरे साथ रहूगा मै यार , मर भी गया मै अगर तो करता रहूगा प्यार .
नए दौर का गाना -
चाँद को तद दुगा , सूरज को मोड़ दुगा
एक बार तू हां कर दे , मै पहले वाला छोड़ दुगा !!

पुराने दौर का गाना -
सात समुन्दर पार मै तेरे पीछे पीछे गयी , जुल्मी बेईमान तेरे कदमो के नीचे गयी !

नए दौर का गाना -
ऊँची है बिल्डिंग , लिफ्ट तेरी बंद है
कैसे मै आऊ? दिल रजामंद है !!

पुराने दौर का गाना
मेरी चन्दा है तू मेरा तारा है तू, मेरी आँखों का सहारा है तू .

नए दौर का गाना
कहते है सभी कि बड़ी हाट हु मै ....................... मगर ख्याल ये रहे ज़रा
मम्मी को नहीं है पता , मम्मी से मत कहना

7 comments:

  1. हिमांशु । Himanshu on September 28, 2009 at 6:03 AM

    यह गाने हमारी बदलती विचारधारा और परिवर्तित हो्ते जीवन-मूल्य ही तो दिखाते हैं ।

    बेहतर प्रविष्टि । आभार ।

     
  2. ताऊ रामपुरिया on September 28, 2009 at 8:05 AM

    बढिया जी. इष्ट मित्रो व कुटुंब जनों सहित आपको दशहरे की घणी रामराम.

     
  3. ताऊ रामपुरिया on September 28, 2009 at 9:50 AM

    इष्ट मित्रों एवम कुटुंब जनों सहित आपको दशहरे की घणी रामराम.

     
  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on September 28, 2009 at 6:24 PM

    वाह....।
    बहुत खूब !
    बोदूराम की फोटो भी लगानी चाहिए थी।
    असत्य पर सत्य की जीत के पावन पर्व
    विजया-दशमी की आपको शुभकामनाएँ!

     
  5. Nirmla Kapila on September 28, 2009 at 9:21 PM

    वाह पंकज जी आज तो गीतमय मूड है बधाई

     
  6. लता 'हया' on September 29, 2009 at 2:38 AM

    thanx .maine dhyaan diya hai ,dont worry aur log bhi denge.
    happy dashera

     
  7. Rakesh Singh - राकेश सिंह on September 30, 2009 at 1:34 AM

    वाह ... वाह .... ग़ज़ब ढा रहे हो पंकज भाई |

    लगे रहो पंकज भाई ... हिंदी ब्लॉग जगत मैं हास्य और व्यंग की सख्त आवश्यकता है | आप हास्य - व्यंग मैं नै उचाई को छुएँ .. मेरी शुभकामनाएं आपके साथ है |

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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