अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

बोदूराम चला परदेश

by Mishra Pankaj | 5:00 AM in |

नमस्कार , काफी दिन से बोदूराम के बारे में चर्चा ना होने के कारण बोदूराम नाराज हो गए थे इसीलिए आज फिर से बोदूराम की बारी है.

बोदूराम को गाव में मजा नहीं रहा था तो बोदूरामने सोचा क्यों ना एक चक्कर मुंबई का लगा लिया जाए . बस यही ख्याल आते ही बोदूराम मुंबई जाने के लिए तैयार हो गए . पड़ोस के गयादीन से ये भी पुछ लिया कि मुंबई जाने के लिए रेल कहा से मिलेगी . गयादीन ने बताया कि रेल मुगलसराय रेलवे स्टेशन से मिलेगी . बस क्या था बोदूराम पहुच गए मुगलसराय .



बोदूराम रेलवे स्टेशन पहुचे ही थे कि आवाज आयी कि प्लेटफोर्म नंबर दो से तेज गाडी पास हो रही है कृपया लाइन पार ना करे .

बोदूराम ने इतना सूना और फटाक करके रेलवे लाइन पर जाकर आराम से बैठ गए . एक आदमी बोला , अबे मरना है क्या एक तो वैसे ही ट्रेन लेट है तू मरके एक दो घंटे और बिगाडेगा . हट जा वहा पर ट्रेन रही है .


बोदूराम ने जवाब दिया - मरोगे तो तुम सब सूना नहीं ट्रेन प्लेटफार्म नंबर दो पर आ रही है , ,मै तो लाइन पर हु प्लेटफार्म पर तो तुम हो .



किसी तरह बोदूराम को सबने समझा बुझाकर वहा से हटाया .
मुंबई आने वाली ट्रेन भी गयी बोदूराम भी टीयर सी में बैठ गए .


टी टी आया और टिकट माँगने लगा .बोदूराम हैरान टिकट तो लिया ही नहीं.
टी टी बोला - टिकट दिखाओ .
बोदूराम ने एक कागज का टुकडा पकडा दिया
टी टी - ये क्या है
बोदूराम - टिकट
टी टी - एक तो सी में सफ़र और वो भी बिना टिकट ऊपर से मुझे बेव्कोफ़ बनाते हो कागज का टुकडा देकर कि यह टिकट है .


बोदूराम- तो और लोग या तुम्हे स्वर्ण पात्र दे रहे है ?
टी टी बोला - तुम अगले स्टेशन पर उतर जाना नहीं तो हम उतार देगे और अगले स्टेशन पर पुलिस ने बोदूराम को ट्रेन से उतार दिया .

बोदूराम्भी हार नहीं माना सीधे रेलवे लाइन पकड़कर मुंबई की तरफ चल दिया .



पीछे से ट्रेन भी चालू हो गयी जब ड्राईवर ने देखा कि कोई पागल रेलवे लाइन के ऊपर से जा रहा है तो लगा जोर जोर से हार्न बजाने .

बोदूराम पीछे मुड़कर देखा और बोला - पहले उतार दिए अब हार्न बजाकर बुला रहे हो नहीं आउगा :)

9 comments:

  1. दिगम्बर नासवा on September 26, 2009 at 5:41 AM

    हां.. हां ..... बोदुराम को सब पागल samajhte हैं ........... jawaab नहीं .... काया majedaar kissa है ........

     
  2. Suman on September 26, 2009 at 7:52 AM

    बोदूराम पीछे मुड़कर देखा और बोला - पहले उतार दिए अब हार्न बजाकर बुला रहे हो नहीं आउगा .nice

     
  3. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on September 26, 2009 at 9:27 AM

    जच हो बोदूराम जी!
    अष्टमी, नवमी और विजयादशमी की बधाई!

     
  4. मुकेश कुमार तिवारी on September 26, 2009 at 10:42 AM

    पंकज जी,

    बोदूराम के साथ पूरी हमदर्दी रखते हुये, रोचक लगी यह पोस्ट आपकी।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

     
  5. Nirmla Kapila on September 26, 2009 at 12:20 PM

    षा हा हा इतने दिन बाद आया है बोदूराम बिलकिल भी नहीम बदला बदिया है शुभकामनायें

     
  6. Nirmla Kapila on September 26, 2009 at 12:20 PM

    षा हा हा इतने दिन बाद आया है बोदूराम बिलकिल भी नहीम बदला बदिया है शुभकामनायें

     
  7. अर्शिया on September 26, 2009 at 3:48 PM

    बहुत बढिया।
    यात्रा मंगलमय हो।
    दुर्गा पूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    ( Treasurer-S. T. )

     
  8. ताऊ रामपुरिया on September 26, 2009 at 5:01 PM

    जय हो बोदूराम की...सबकी बोलती बंद कर रखी है बोदूराम ने?:)

    रामराम.

     
  9. Rakesh Singh - राकेश सिंह on September 30, 2009 at 1:42 AM

    हा.....हा.... बोदुराम बहुत चालाक है भाई ..... बिलकुल मस्त ... मजा आ गया

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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