अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

नमस्कार मै पंकज मिश्रा आपका स्वागत करता हु अपने ब्लाग " अहसास रिश्तो के बनने बिगडने का" .

आप सबको पता है कि मै अपने ब्लाग पर बोदूराम के नाम से लिखता हू . जैसा कि दो दिन पहले डा. अरविन्द मिश्रा जी ने पूछा था कि आपने ये नाम कहा से खोजा ?

खैर ये बात तो मै बाद मे बताऊगा अभी कुछ और बताना है .

हिमांशु जी ने भी इस नाम को लेकर थोडा खूशी व्यक्त किया था .

हुआ यु कि मै ये बात सीधे बोदूराम से ही पुछ लिया कि तुमने अपना नाम बोदूराम क्यो रखा, नाम बदल लो .

अब बात अट्क गयी कि नया नाम क्या रखा जाय.

बोदूराम निकल पड़े नाम खोजने .

पहले बोदूराम को एक आदमी मिला , भीख मागते हुए बोदूराम ने पुछा - भई आपका क्या नाम है ?
आदमी ने जवाब दिया- कुबेर प्रसाद

बोदूराम आगे बढे , दूसरा आदमी मिला बैंक से लोन निकालते हुए .
बोदूराम ने उससे पूछा - भाई आपका क्या नाम है ?

आदमी ने जवाब दिया- लक्ष्मीपति.

बोदूराम आगे गये . सामने से एक जनाजा जा रहा था बोदूराम ने एक आदमी से पुछा कि कौन मर गया?
आदमी ने बताया - अमरलाल

बोदूराम आगे बढे - सामने से एक व्यक्ती को आम तोडते देखा पूछने पर पता चला कि उसका नाम इनरपाल है .
अब बोदूराम वापस आये तो मै पूछा - क्यु बोदूराम कोई नाम पसन्द आया?

बोदूराम ने जवाब दिया-

कुबेर प्रसाद को भीख मागते देखा,
लक्ष्मीपति को लेते लोन,
अमरलाल का निकला जनाजा
इनरपाल को तोडते आम,
सबसे अच्छा है बोदूराम. :)


12 comments:

  1. अनूप शुक्ल on September 9, 2009 at 6:22 AM

    बड़ी समझदारी से नाम रखा है।

     
  2. हिमांशु । Himanshu on September 9, 2009 at 7:36 AM

    पंकज भाई ! मैं भी सोच रहा हूँ इस नाम के निहितार्थ । वैसे बोदूराम नाम खूबसूरत है ।

     
  3. Arvind Mishra on September 9, 2009 at 7:51 AM

    हा हा बोदूराम ही भला नाम है तबतो !

     
  4. Nirmla Kapila on September 9, 2009 at 10:04 AM

    कुबेर प्रसाद को भीख मागते देखा,

    लक्ष्मीपति को लेते लोन,
    अमरलाल का निकला जनाजा
    इनरपाल को तोडते आम,
    सबसे अच्छा है बोदूराम. :)
    कि नयनसुख दुनिया को देख नहीं पाता और गरीबदास महलों मे रहता है खुशी राम हर दम रोता रहता है --- मगर बोदु राम सही है अक्ल का इस्तेमाल तो करेगा हा हा हा

     
  5. ताऊ रामपुरिया on September 9, 2009 at 10:42 AM

    जय हो बोदूराम जी की.

    रामराम.

     
  6. दिगम्बर नासवा on September 9, 2009 at 12:01 PM

    DAM HAI IS NAAM MEIN ....... JAI HO BODURAAM KI ......

     
  7. Babli on September 9, 2009 at 12:56 PM

    वाह बढ़िया लिखा है आपने! मुझे बोदूराम नाम बड़ा पसंद आया!

     
  8. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on September 9, 2009 at 1:02 PM

    कहने और सुनने दोनों ही में अच्छा लगता है।
    वाह....बोदूराम।

     
  9. प्रसन्न वदन चतुर्वेदी on September 9, 2009 at 10:27 PM

    आप ने एकदम दुरुस्त फ़रमाया है...बोदूराम नाम अच्छा है..बहुत बहुत बधाई...

     
  10. seema gupta on September 10, 2009 at 3:08 PM

    बोदुराम का जैसा नाम वैसा काम हा हा हा रोचक....
    regards

     
  11. Rakesh Singh - राकेश सिंह on September 10, 2009 at 8:31 PM

    वाह ... वाह .... |

     
  12. निर्झर'नीर on September 11, 2009 at 3:30 PM

    LOL

    kamra to khoob bhara hai ..ab naukri ki kya jarurat

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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