अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी



नमस्कार, आप सब को !

आज सुबह-सुबह ही बोदूराम भागा-भागा आया और लगा मेरा चद्दर खीचने .
मै बोला भाई इतने सुबह सब खैरियत तो है ना ?

अरे पंकज जी सवाल छोडिये शाबाशी दीजिये ?
मै कहा ऐसा क्या तूने कर दिखाया जो इतना उछल रहा है ?
उसने हाथ में लिया अखबार पकडा दिया . उसमे "एक विवाह ऐसा भी" का प्रचार छपा था . मै बोला क्या इस फिल्म को देखना है ?

बोदूराम- अरे नहीं भाई नीचे देखो .
मै नीचे नजर दौडाया तो एक विज्ञप्ति था . आफिस खोलने के लिए मकान किराए पर ले .
मै बोला ये मकान का ...
बोदूराम - हां हा सही पहचाना आपने .
मैंने उससे पूछा तो इरादा क्या है बोदूराम जी .


बोदूराम - देखो भैया , बहूत कर ली नौकरी , बहूत धक्के खा लिए अब तो अपना खुद का बिजनेश डालूगा.
मै पूछा कैसे ?
बोदूराम -देखिये कल आपने मेरे एक रूम का फोटो देखा था ना वैसे मेरे पास ६ रूम है और टोटल मेरे पास एक करोड़ रुपया है . खुद का बिजनेश करूगा.

एक करोड़ लगाउगा , साल भर में एक करोड़ अन्दर , पैसे की रोलिंग अपने आप शुरू हो जायेगी .
मगर बोदूराम इसमे रिस्क है .
बोदूराम - पंकज जी रिस्क नहीं सब समझ कर बात कर रहा हूँ , टेंसन नहीं है , माइंड एकदम क्लीयर है .
मै कहा तो मै इसमे क्या कर सकता हूँ ?


बोदूराम - कुछ नहीं बस आप कह दो कि सही सोचा हूँ .
मै पूछा , भाई मेरे कहने ना कहने से क्या होयेगा ?
बोदूराम - मुझे एक बीमारी है जब तक एक दो लोग सही ना कह दे तो मै २+२=४ भी सही नहीं मानता .
मै बोला - सही है


किसी तरह बोदूराम चले गए
अगले दिन पता चला कि बोदूराम बिल्डिंग बनाने का काम शुरू कर रहे है , मै भी उदघाटन में गया तो देखा बड़े-बड़े अक्षरो में लिखा था
बोदूराम कंस्ट्रक्सन
अगले दिन सुबह देखा बोदूराम घर पर बैठे चाय पी रहे थे , मै बोला अरे बोदू भाई आज आफिस नहीं गए क्या ?

बोदूराम- नहीं भाई आफिस बंद कर दिया .
मै अचम्भीत हो गया , मै पूछा क्यों ?
बोदूराम - अरे शाम को जगह का ८० लाख जमा किये सुबह ससुरे साफ़ मुकर गए .
मै बोला - ये तो आप के साथ बहूत बुरा हुआ .
बोदूराम - बुरा कुछ नहीं हुआ पंकज जी ८० लाख गया , एक करोड़ का अनुभव मिला बिजनेश करो पर पार्टनर शिप में नहीं .


मै बोला फिर भी ८० लाख कम नहीं होते है .
बोदूराम - अरे पंकज जी आप समझो तो सही ८० लाख दिया ,
एक करोड़ का अनुभव मिला कि धंधा कैसे करना चाहिए . बीस लाख फायदे में हूँ ना ?
मै बोला अब बाकी पैसे का क्या करोगे .
बोदूराम - बहूत है २० लाख में समोसे की दूकान डालूँगा एक साल में एक करोड़ अन्दर पैसे की रोलिंग शुरू .

मै बोला - अच्छा ?
बोदूराम - ठीक है ना ?
मै बोला - मुझसे क्या पूछते हो ?
बोदूराम - आपको बताया था ना कि मुझे रोग है .
मै बोला ठीक है .
दो दिन बाद बोदूराम फिर से मिले मै पुछा बोदूराम जी दूकान कैसी चल रही है


बोदूराम बोले - सब स्वाहा
मै बोला क्या हुआ ?
बोदूराम - आपको नहीं बताया था क्या ? समोसे की दूकान खोलने के लिए एक रूम किराये पर लिया २० लाख डिपाजिट दिया सुबह मकान मालिक मुकर गया कि मै उसे पैसा नही दिया हूँ.
मै बोला तब तो आपके साथ बुरा हुआ ?

बोदूराम - बुरा कुछ नहीं हुआ पंकज जी बुरा कुछ नहीं हुआ . मेरा क्या गया एक करोड़ लेकिन उनको क्या मिला ?
मै बोला - क्या
बोदूराम - पाप
मै बोला - अब क्या करोगे
बोदोराम - पंकज जी सीख गया हूँ बिजनेश में क्या नहीं करना है और क्या........ नहीं करना है .

मै बोला- इतना रकम गया सारा पैसा गवां दिया तुमने
बोदूराम - अरे पंकज जी ये बोदूराम आल टाइम एक्टिव है इतने जल्दी हार नहीं मानेगे
आप को एक राज की बात बताता हु . अभी मै सिर्फ एक रूम का पैसा खर्चा किया हु बाकी ५ रूम बाकी है और १ करोड़ में ५० लाख तो मै नकली मिलाया था :)




10 comments:

  1. संजय तिवारी ’संजू’ on September 11, 2009 at 6:46 AM

    लेखनी प्रभावित करती है.

     
  2. Arvind Mishra on September 11, 2009 at 7:09 AM

    बोदूराम उभर रहे हैं !

     
  3. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on September 11, 2009 at 7:42 AM

    "बोदूराम आल टाइम एक्टिव है इतने जल्दी हार नहीं मानेगे
    आप को एक राज की बात बताता हु . अभी मै सिर्फ एक रूम का पैसा खर्चा किया हु बाकी ५ रूम बाकी है और १ करोड़ में ५० लाख तो मै नकली मिलाया था"

    वाह...वाह....।
    बहुत खूब!
    अच्छा सन्देश है!

     
  4. ताऊ रामपुरिया on September 11, 2009 at 8:06 AM

    बोदूराम जी का जवाब नही.:)

    रामराम.

     
  5. Nirmla Kapila on September 11, 2009 at 11:16 AM

    पंकज जी कमाल है आपका बोदूराम् सोच हो तो बोदूराम जैसी ,इसे कहां से उठा लाये? कुछ दिन हमारे पास भी भेज दीजिये हमे भी इस जैसे गुर सीखने हैं सीखने है एक दम मस्त, बधाई
    बहुत बडिया लिखते हैम आप

     
  6. Nirmla Kapila on September 11, 2009 at 11:16 AM

    पंकज जी कमाल है आपका बोदूराम् सोच हो तो बोदूराम जैसी ,इसे कहां से उठा लाये? कुछ दिन हमारे पास भी भेज दीजिये हमे भी इस जैसे गुर सीखने हैं सीखने है एक दम मस्त, बधाई
    बहुत बडिया लिखते हैम आप

     
  7. ओम आर्य on September 11, 2009 at 3:01 PM

    achchhi lagi aapaki yah post .....aapake lekhan me bandhane ki purn kshamata hai ......aise hi likhate rahe .......

     
  8. Babli on September 11, 2009 at 3:03 PM

    कमाल का लिखा है आपने! इस बोदूराम का तो जवाब नही ! बहुत ही प्रभावशाली लेख!

     
  9. Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" on September 11, 2009 at 11:32 PM

    बोदूराम का ताऊ से जरूर कोई न कोई कनैक्सन है। मन्नै तो यूँ लगै कि हो न हो या तो ताऊ उसका गुरू होगा या फेर वो ताऊ का..:)

     
  10. दिगम्बर नासवा on September 12, 2009 at 1:28 AM

    BODURAAM KA DIMAAG AISE HI CHALTA RAHA TO SAB BLOGERS KO BHI KHAREED LEGA KISI SAMAY ..... BAHOOT DIMAAG HAI .....

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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