अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

नमस्कार , मै पंकज अपने साप्ताहिक पोस्ट हँसी के रंग-पंकज के संग भाग ५ में !!



बोदूराम घर पे आराम कर थे तभी एक भिखारी आया और दरवाजे पर चिल्लाने लगा रोटी दे दो रोटी बहुत भूखा हु .
बोदूराम बाहर आया बोला बीबी जी घर पे नहीं है .
भिखारी बोला - मुझे बीबी नहीं रोटी चाहिए .
बोदोराम झुझला गया और बाहर आया १० रुपये के नोट दिया और बोला ये लो पर ये बताओ तुम इतने गरीब कैसे हो गए .
भिखारी बोला - पहले मै भी आप की तरह सबको ऐसे ही १० रुपये दे दिया करता था .
.http://www.funny-junk.co.cc/wp-content/uploads/2009/01/funny-tiger-animation.gif

बोदूराम सड़क पर से जा रहे थे उनको जाना था लाल किला रोड पर सामने से एक आदमी रहा था बोदूराम ने पूछा क्यों भाई ये रास्ता लाल किला जाता है .
आदमी ने जवाब दिया - ये रास्ता कही नहीं जाएगा जाना तुमको होगा .
बोदूराम ने पूछा - कितना दूर होगा
आदमी - १० मिनट का रास्ता है
बोदूराम - भाई साहब घड़ी उधार दे दो दरअसल घड़ी है नहीं मेरे पास तो समझूगा कैसे कि मै १० मिनट चल चुका हूँ .

5 comments:

  1. M VERMA on September 20, 2009 at 5:21 AM

    बहुत खूब -- बढिया है
    हा हा हा

     
  2. दिगम्बर नासवा on September 20, 2009 at 1:33 PM

    Ha ..Ha ...Ha .....
    Lajawaab ..... ek se badh kar ek

     
  3. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on September 21, 2009 at 8:20 AM

    बोदूराम के लतीफे बढ़िया रहे।

     
  4. Hemant Snehi on September 21, 2009 at 6:33 PM

    बहुत अच्छे लतीफे लिखते हैं आप. बहुत-बहुत बधाई.

     
  5. Hemant Snehi on September 21, 2009 at 6:36 PM

    बहुत अच्छे लतीफे लिखते हैं आप. बहुत-बहुत बधाई.

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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