अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी


नमस्कार जैसा कि आपको मै कल बताया था कि बोदूराम को जनगणना करने कि नौकरी मिल गयी है . आज सुबह सुबह ही बोदूराम सज धज कर ब्लाक पर पहुच गए पेपर कलम लेने के लिए . जैसा कि मै पहले बता चुका हूँ ब्लाक पर एक बार आशीष खंडेलवाल जी बोदूराम जी का इंटरव्यू ले चुके है . अतः बोदूराम उनको देखते ही खिसकने की कोशीश करने लगे . लेकिन फिर उन्हें मिश्रा जी के जुगाड़ का ख्याल आ गया . आशीष जी ने तो देखते ही पूछा तुम फिर ?

बोदूराम : हां साहब फिर डा. मिश्रा जी ने हमें यहाँ भेजा है नौकरी के लिए आप ना नहीं कर सकते .

आशीष : क्यों .
क्युकी अगर ये नौकरी मेरे हाथ से गयी तो मुझे आजीवन कुवारा रहना होगा और इसके जिम्मेदार आप होगे सिर्फ आप .

आशीष जी घबडा गए और बोले मेरे भाई मै नहीं चाहता कि तू कुवारा मर लेकिन तू कोई काम ठीक किया हो तो बता ?
चलो कोई बात नहीं मै तुम्हे ये काम दे रहा हु .

बोदूराम : अच्छा मुझे करना क्या होगा ?
आशीष जी : कुछ नहीं बस घर घर जाना और पूछना है कि शादी हुई है बच्चे है यही सब और क्या ?

बोदूराम खुशी खुशी झोला लेकर निकल पड़े . सबसे पहले एक घर गए तो वहा एक २० साल कि लडकी मिली . बोदूराम ने नमते करके बोला
हमें यहाँ जनगणना के लिए भेजा गया है कुछ प्रश्न का उत्तर चाहिए बस .
लड़की बोली : पूछिये
बोदूराम : आपकी शादी हुई है ?
लड़की : नहीं
बोदूराम ने कापी में नोट किया शादी नहीं हुई है
बोदूराम ने दूसरा प्रश्न किया : आपके कितने बच्चे है ?
लड़की ने जोरदार चाटा मार और बोली कमीने तेरी माँ बहन नहीं है क्या दफा हो जा यहाँ से .
बोदूराम : माँ बहन है पर मुझे ये एरिये का काम मिला है .

अब तो बोदूराम को गुस्सा आया कि आशीष जी ने जान बूझकर उनको मार खिलवाया .

बोदूराम ने आते ही आशीष जी पूछा : आपने ऐसा सवाल क्यों दिया है कि मुझे चाटा पड़े .
आशीष जी ने सारे बातें सुने और बोले तुम पहले ये पूछा करो कि बच्चे है फिर शादी कि बात .

बोदूराम फिर निकल पड़े . पहुच गए एक ८० साल के बुढिया के पास और बोले अम्मा आपका नाम ?
रामसखी
अच्छा आपके बच्चे कितने है ?
रामसखी : ५
बोदूराम : आपकी शादी हुई है ?
रामसखी : मुरख शादी के पहले बच्चा होता है क्या ( चटाक ) और और चाटा.

बोदूराम वापस आये और बोले साहब जनगणना करने भेजते हो या चाटा खाने ?

6 comments:

  1. Udan Tashtari on August 29, 2009 at 5:30 PM

    जनगणना करने गये बोदूराम और लौटे मजबूतीराम?

     
  2. Pankaj Mishra on August 29, 2009 at 6:05 PM

    समीर साहब गलती हो गयी थी धन्यवाद सुधार करवाने के लिए

     
  3. दिगम्बर नासवा on August 30, 2009 at 6:15 PM

    Bhai vaah gazab ke hain Bodoo Raam .....

     
  4. ताऊ रामपुरिया on August 30, 2009 at 10:02 PM

    भाई जरा बोदूराम और मजबूतीराम को संभाल कर रखना ये बहुत जल्दी पाला बदलते हैं:)

    रामराम.

     
  5. आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) on August 31, 2009 at 9:57 AM

    हा हा हा.. हैपी ब्लॉगिंग

     
  6. Arvind Mishra on September 1, 2009 at 6:15 AM

    अब क्या करियेगा बोदूरामों की नियति ही यही है तो !

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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