अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

जैसा कि आपने पहले पढा था कि जन्माष्टमी के दिन बोदूराम मटकी फोडो प्रतितोगीता में प्रथम स्थान प्राप्त कर के रामकटोरी को शादी के लिए मना लिया था और कुछ ही दिन बाद शादी की बहुत ही मनोरंजक घटना आप यहाँ पढोगे
मै आपको एक बात बता दू यह सब जो आज मै लिख रहा हु हमारे ताऊ जो कि ब्लॉग जगत के वरिष्ठ ब्लॉगर है उनकी प्रेरणा से मुमकिन है
कुछ दिन बाद बोदूराम शादी का निमंत्रण लेकर वापस ताऊ के पास जाने वाला है और हां कुछ और ब्लॉगर को बोदूराम ने मार्क किया है अपने शादी में बुलाने के लिए ।
चलिए अब आज की बात करते है ये बात आज की है और राज की भी । सुनिए ।

रामकटोरी के पिताजी ने बोदूराम को अपने घर बुलाया देखने के लिए बोदूराम भी सज धजकर पहुच गए वहा पर बोदूराम की खूब आव भगत हुई । सभी लोग घर के इकट्ठा थे । रामकटोरी के पिताजी ने सवाल किया बेटा कहा से पढ़ाई किए हो?

बोदूराम : जी ताऊ आश्रम से ।

अच्छा वहा क्या क्या पढाया जाता है ? रामकटोरी के पिताजी ने दुबारा पूछा ।

बोदूराम: सब कुछ समाज में होने वाले सारे घपले करना सिखाया जाता है ।

इतने में कही से ताऊ भी आता दिखायी दिया अब बोदूराम ने सोचा कि मै ताऊ और ससुराल वालो के सामने इंग्लिश बोलूगा तो मेरा कद ऊँचा हो जायेगा । इसी गरज के साथ बोदूराम अपने होने वाले ससुर से बोला - टू कप टी!

बोदूराम का ससुर सोचा मुझे गाली दे रहा है (हमारे यहाँ कपटी मतलब धोखेबाज़ होता है)
बोदूराम के ससुर ने दुबारा पूछा -क्या कहा ?

बोदूराम - टू कप टी :

अब तो रामकटोरी का बाप सनक गया और बोला - साले मै कपटी नही -तू कपटी , तेरा बाप कपटी , तेरा सारा खानदान कपटी












2 comments:

  1. ताऊ रामपुरिया on August 19, 2009 at 8:00 AM

    वाह बडा जोरदार किस्सा बताया.बोदूराम लगता है इस ताऊ अंग्रेजी को बोलकर कंवारा ही रहेगा हमेशा.:)

    रामराम.

     
  2. Babli on August 20, 2009 at 6:30 AM

    वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! पढकर बहुत अच्छा लगा!
    मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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