अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी




नमस्कार और आप सभी को स्वंतंत्रता दिवस की घणी बधाई




आज सुबह से ही मन कितनी बार खुशी से झूम रहा है की आज हमारा स्वतन्त्रता दिवस है और पूरा देश आज जश्न मना रहा है ।




हमारे कई ब्लॉगर साथियों ने अपने अपने ब्लॉग पर अलग अलग तरह से इसको प्रदर्शीत भी किया है ।


"हमें गर्व है की हम भारतीय है " बिल्कुल सही बात हम सबको गर्व की हम भारतीय है ।


पर क्या हमारे बापू जी ने इसी तरह की स्वंतंत्रता की आशा की थी ?


क्या आपको लगता है की बड़े बड़े व्यापारीक स्कूल में पढ़ाई करनेवालो के लिए छोटे छोटे कपडा पहनना चाहिए पश्चिम सव्भ्यता के नाम पर ?


क्या जिस सभ्यता से जान छुडानेके लिए हमारे देश के नौजवानों ने जान न्योछावर किया वही सभ्यता वापस लाना जरूरी है ?




स्वंत्रता का ये कौन सा रूप है कि हम किसी रेल में बस में अपने परिवार बहु बेटियों के साथ यात्रा कर रहे है और कुछ स्वंत्रत व्यक्ती उनको देखकर सिटी बजाये और गाना गाये ?


आप रेलवे के बाथरूम में जाए तो कुछ स्वंत्रत लोग अपनी स्वंतंत्रता का इस तरह से परिचय देते है की बाथरूम के चारो तरफ़ गंदी फोटो और शायरी लिखी मिलती है ।


सीट के अगले हिस्से पर किसी का मोबाइल नम्बर लिखा मिलता है । क्या यही स्वतन्त्रता है ?


कही कोसी की बाढ़ में लोग राजनीती भुनाने में लगे है तो कही दंगा फैलाने घरो में आग लगाने वाला मंत्री बनाया जा रहा है ।


कही किसी अमीर घर का लड़का हिमालय कि असीम उचाई पर पहुचकर अपना नाम हर मैगजीन में छाप रहा है और हम भी हमारी मीडिया भी उनका भरपूर साथ दे रही है दूसरी तरफ़ कितने बाल मजदूर दिन भर सौ सौ महले की बिल्डिंग पे बिना नास्ता खाना दिन भर चढ़ उतर रहे है गारा पानी दे रहे है सामने से ही कोई गुजर जता है लेकिन ध्यान नही देता हा कभी कभार एकाध फोटो छाप देते है बल मजदूर दिवस पर ।


लेकिन पत्रकार भाई फोटो छपने भर से उनकी पीडा बंद नही होती आप जैसे बड़े लोगो का ग्लामरस छपते हो वैसे ही मजदूर लोगो की पीडा भी लोगो तक पहुचाइए । बस




कही पे दलितों को प्रताडीत किया जा रहा है तो कही पे दलित दलित के नाम पर लोगो को प्रताडीत कर रहे है


ग्रामीण विकाश मंत्री ने यह कहा है कि मेरा काम रिपोर्ट को देखना नही है रिपोर्ट देखना सचिव और उप सचिव परिषद् का है मेरा सिर्फ़ एक प्रश्न आप से है कि क्या आपका काम लाल बत्ती में घूमना भर है और जगह जगह फीता काटना भर है ?




लिखना तो बहुत कुछ है पर आप इतने अंदाजा लगा लीजिये तो अच्छा है ।




कही पे जश्न होता है , कितने भूखे ही सोते ।


कुता दूध पिता है , बच्चे रोते ही सोते है ॥




एक बात साफ़ है हमारे नेतागण इस बात से परेशान नही होते जानते है क्यों ?




क्युकी उनको पता है की जिस दिन ये सारी समस्याए वो ख़तम कर देगे तो उंके लिए समस्याए खड़ी हो जायेगी ।


क्युकी उनके पास यही सारे तो मुद्दे होते है चुनाव के ।




अब प्रश्न इतने सारे है और प्रश्न ये है की उत्तर क्या है ?




पंकज मिश्रा


चित्र साभार गूगल




7 comments:

  1. Arvind Mishra on August 15, 2009 at 9:06 PM

    सही कहा पंकज आपने -ये सारे प्रश्न उत्तर के मोहताज है !

     
  2. Babli on August 15, 2009 at 9:54 PM

    वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

     
  3. ताऊ रामपुरिया on August 17, 2009 at 9:35 AM

    भाई या तो प्रश्न रहेंगे या नेता रहेंगे..जैसे दिन और रात साथ नही हो सकते. अब यह निर्भर करता है जनता पर कि उसे किसको रखना है?

    रामराम.

     
  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on August 17, 2009 at 4:57 PM

    देर से ही सही।
    योम-ए-आजादी की बधाई तो ले ही लो।

     
  5. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on August 17, 2009 at 4:57 PM

    देर से ही सही।
    योम-ए-आजादी की बधाई तो ले ही लो।

     
  6. Anonymous on October 20, 2009 at 3:39 PM

    "प्रश्न ये है कि उत्तर क्या है ?"

    uttar is a disha (direction)

     
  7. alok on August 13, 2010 at 12:22 PM

    पकज जी यह पीउा हम सब की है पर शायद हम खुद इस पीडा को नजर अंदाज करते आ रहे हैं इन समस्‍याओं को भी औ इन नेताओं को भी जो लगातार हमें चुभ रहे हैं। रही बात उत्‍तर की तो वह हमें भी पता है और आपको भी पर पाना नही चाहते अगर पा लिया तो यह आजादी दिवस हम सबका सचमुच का आजादी दिवस होगा।
    नमस्‍कार सकारात्‍मक शुभकामनाओं के साथ

     

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श्री गुरुवे नमः

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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