अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

नमस्कार….आज  खाना खाते समय एक फ़िल्म मे एक गुंगे व्यक्ति का रोल देखा ..वैसे तो वह कामेडी कर रहा थे और सब हस -हस कर लोट-पोट हो रहे थे !

लेकिन अचानक मुझे यह बात ध्यान मे आ गयी कि यह तो एक कलाकार है जो गुंगे का रोल कर रहा है …इस समाज मे कितने गुंगे-बहरे अन्धे पडे हुए है उनको तो ऐसा कला करने का ना तो पैसा मिलता है और ना ही मै चाहता हु कि उनको कभी इस तरह की कोई कला करने की जरूरत है…भगवान अगर उनको कलाकार बना सकता तो गुंगा क्यु बनाता

अब तो मन मे यह आता है कि हम सब तो अपनी बातों को एक दुसरे से कह कर अपने मन को शान्त कर लेते है,,पर ऐसे लोग बेचारे भला वो क्या करते होगे?

कैसे अपने मन को कोई मना सकता है..कैसे किसी वस्तु बिषय के बारे मे बात करते होगे ये गुंगे …क्य हमारी सरकार ..और सरकार तो छोडिये हम खुद क्य करते है उनके लिये?

अन्धा होना , गुंगा बहरा होना एक अभिशाप है मानता हु या नही ..ये मत पुछिये लेकिन इतना जरुर जानता हु कि इनकी मदद करना हमारे लिये आशिर्वाद है हमे मिलेगा .

अगर आप इनकी मदद करेगे तो वाकई आप का दिल आप को सराहेगा और दुनिया मे मै उसी काम को सबसे अच्छा मानता हु जिसे करने के बाद समाज के साथ-साथ खुद का दिल भी कहे कि हां आज हमने ये बहुत अच्छा काम किया है….

रही बात समाज कि तो अकेले समाज के सराहने से कुछ नही होता ….क्युकि समाज मे कई तरह के लोग है शायद आप जिस काम को अच्छा मानते हो उसी को समाज का एक हिस्सा खराब बता दे…कभी समय मिले तो हमारे बातों पर गौर फ़रमाईयेगा

क्या कभी सोचा है आपने ऐसे लोगो के बारे में सोचिये और भरोसा है जिस दिन सोचेगे मेरी तरह सामने रखा निवाला भी अन्दर नही ले पायेगें

नमस्कार

समीर newनमस्कार , पंकज मिश्रा आपके साथ …कल अचानक तो नही मेरे नम्बर भेजने के बाद ब्लाग जगत के बादशाह ……आप तो समझ ही गये होगे कौन?

नही समझे अरे भईया बादशाह है ही कितने अपने समीर लाल “समीर” जी की बात कर रहा हु  …..ह तो अपने ब्लागजगत के बादशाह श्री मान समीर लाल जी का फ़ोन आया हमारे पास ….मै तो नम्बर देख कर ही समझ गया कि यह भारत मे तो कही से नही नम्बर है क्युकि यहा से लगभग सारे नम्बर का पहला दुसरा तो मालूम ही रहता है ..

खैर फ़ोन आया तो बात भी हुई ..दमन से घूमते-घूमते वापी ,वलसाड , नवसारी सुरत होते हुए हमारे जनपद जौनपुर तक बात आ गयी और हमारे जनपद मे समीर जी के रिस्तेदार रहते है जानकर खुशी हुई

अन्त मे समीर जी ने मुझसे कहा ..पन्कज और कुछ बताओ.

मेरे मुह से अचानक यही निकल गया जो कि सत्य है, मै बोला-

सर आप शरीर से जितने भारी लगते हो आपकी आवाज उतनी ही पतली है…और इसी बात के साथ प्रणाम के साथ हसते हुए मै और समीर जी ने फ़ोन बन्द किया ..

अब आप जितने लोगो ने आज तक समीर जी से बात किया है बताईये मै सही कहा कि नही ?

नमस्कार ...पंकज मिश्रा आपके साथ ...काफी दिनों से कूछ लिख नहीं पाया इस ब्लाग पर ..आज कोशीश कर रहा हु देखिये..

हुआ युं कि मै   छुट्टी में घर गया था और वहा पर छुटी का मौज लिया अब यहाँ आकर काम का बोझ ..बाप रे बाप! चलिए आपको बोदूराम के कारनामो से परिचय करवाते है ..

हमारे गाव में एक साहूकार है,  नाम है सोहन सेठ ..हुआ यु कि सोहन सेठ के पिताजी की मृत्यु हुए एक साल हो गया था ..मृत्यु के समय में भी होने वाले भोज में सोहन सेठ ने अपने कंजूसी का भरपूर परिचय  दिया था .....खाना खिलाने में कटौती कर  दी थी. और दान दक्षिणा में तो बिलकुल रूचि नहीं दिखाई थी..

साल भर बीतने के बाद गाव वालो ने कहा कि सेठ अपने पिताजी को गया पहुचा आओ ...गया बिहार में पड़ता है और हमारे यहाँ कि ऐसी मान्यता है कि अगर मृतक के सम्बन्ध का कोई गया जाकर मृतक के नाम का पिंड दान करे तो मृतक की आत्मा को शांति मिलती है ..खैर सोहन सेठ ने भी गया जाने का निर्णय ले ही लिया .
सोहन सेठ गया में पहुच भी गए ..जो भी पंडित सोहन सेठ के पास क्रिया कर्म करवाने आता ...सोहन सेठ पहले दाम पूछते ..दाम के मोल भाव में बात नहीं बनी... शाम होने को आ गयी तभी सामने से बोदूराम पंडित आते दिखाए दिए ...

2155430522_ef40f287d4 बोदूराम ने आते ही अपना परिचय दिया -नमस्कार जजमान ..मै यहाँ का पंडित ..क्रिया कर्म विशेषज्ञ ...सरकारी मान्यता प्राप्त हु.  मेरे द्वारा किर्या  करम करवाने से अच्छे अच्छे पापी आज स्वर्ग में बैठे नर्तकी नृत्य का रसपान कर रहे है ..इन्द्र के समक्ष बैठकर वहां के राज काज  में योगदान कर रहे है .मै इस तरह से कर्म कराता हु कि भगवान के पास उसका कोई काट नहीं होता सिवाय मृतक आत्मा को स्वर्ग देने के !!!
सोहन सेठ ने जब ये बातें सुनी तो उन्हें लगा कि अगर यह पंडित इतना बड़ा ज्ञाता है तो इसका रेट (दाम) भी ज्यादा होगा अतः इससे बात ना करू ...सोहन सेठ बोले कि महाराज मुझे कोई कर्म नहीं करवाना है ..
बोदूराम पंडित ताड़ गया कि सेठ तो रुपिया के लालच में मना कर  रहा है अतः बोले - जजमान आपने मेरी पूरी बात तो सुनी नहीं ...और मैं ये सब क्रिया कर्म  करवाने की दक्षिणा सिर्फ ११ रुपये ही लेता हूं .!!

अब तो सोहन सेठ को मुंह मागी मुराद मिल गयी ...और  तुरंत तैयार हो गए...क्रिया कर्म संपन्न हुआ तो सोहन सेठ ने बोदूराम को ११ रुपये देकर चरण  स्पर्श कर चलना चाहा ...तो बोदूराम ने कहा - जजमान एक बात और है मेरे कर्म कराने के बाद कर्म करवाने वाला व्यक्ति शरीर  पर जो कुछ भी धारण किया है उसे देना पड़ता है नहीं तो आगे शनिचर को उसका मौत हो जाता है...सोहन सेठ को तो करंट लग गया करे तो क्या करे?

अंततः सेठ के द्वारा शरीर पर पहने हुये सोने की चन , हीरे की अंगूठी, कडा और और सारे कपडे, यहां तक की  अंडरवीयर भी उतरवा लिया ..कुल मिलाकर  लगभग १ लाख तक का सामन  ऐंठ लिया और  सेठ से बोले -
बोलो बेटा पंडित बोदूराम की जय!
सेठ  बेडे दबे मन से  कहा - पंडित बोदूराम की जय!!!

मंगलवार को हिंदी भाषा के लोकप्रिय दैनिक अखबार "पत्रिका" के ब्लाग चंक स्तंभ मे "प्यारे चूहे साथियो ...जागो

" पोस्ट को स्थान मिला है.

जिसे आप नीचे पढ सकते हैं.gview

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बोदूराम ने नया चाइना मोबाइल लिया ...उसमे गाने तो डलवाया ही था लेकिन एक दिन मोबाइल पर प्रचार आया कि अब करिए अपने कालर्स को प्रभावित ...सुनाइये उनको गाने ..और बनाइये अपना ...
बोदूराम ने भी एक गाना चुना ......भीगे होठ तेरे ...प्यासा मन मेरा ...लगे तन मेरा ...
जो भी बोदूराम को फ़ोन करता ..यही गाना सुनाई देता ...एक दिन बोदूराम के पिताजी अपने हमउम्र दोस्तों के साथ बैठे थे ....अचानक उनको किसी काम की याद आयी और उन्होंने फ़ोन किया ....तो सामने से बोदूराम के मोबाइल पर गाना बजा ...भीगे होठ तेरे ..प्यासा मन मेरा .......

बोदूराम के पिताजी का उनके दोस्तों ने खूब मजाक उडाया ..बोले अरे वाह जनाब आपका बच्चा तो आपको अच्छा सन्देश सुनाया ..पर तुम्हारा होठ तो सुखा है भाई ...हा हा हा हा हा हा हा ,,,,,,

बोदूराम के पिताजी खून के घुट पीकर रह गए घर आये और आते ही बोदूराम को दो लट्ठ लगाकार स्वागत किया ...
बोदूराम ने कारण पूछा तो पिताजी बोले....मेरा होठ सुखा है और तुम मुझे भीगे होठ तेरे गाना सूना रहे हो .....बोदूराम को लट्ठ के साथ ही आत्म ज्ञान आ गया और तुंरत उसने अपना गाना बदल दिया और नया गाना लगा दिया ....ये तो सच है कि भगवान् है .......धरती पे रूप माँ बाप का ...ये बिधाता की पहचान है ....

अब बोदूराम के पिताजी बिना किसी वजह के ही अपने दोस्तों के सामने फ़ोन लगवाते और कहते ...सुन लो हमारा बेटा है .....बिलकुल श्रवन कुमार है .....

उधर बोदूराम की गर्लफ्रेंड भीगे होठ तेरे वाला गाना अपने सहेलियों को सुनाना चाहती थी और जैसे ही बोदूराम को फ़ोन लगाया ..यही गाना आया .....ये तो सच है कि भगवान् है .....धरती पे रूप माँ बाप का .......
बोदूराम की गर्लफ्रेंड नाराज हो गयी और बोदूराम को फ़ोन करके खूब जमकर महाभारत सूना दी ...

बोदूराम परेशान हो गया एक तरफ बाप से लट्ठ तो दूसरी तरफ गर्लफ्रेंड से गाली ....

बोदूराम को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था सामने से ट्रेन आ रही थी ......बोदूराम ने छलांग लगा दी और जाते जाते अपने मोबाईल में ये गाना लगवा गया ....जिंदा हु मै ...जिंदा हु मै ......

ब्लॉग एक ऐसा चौपाल हो गया है जहा पर हम अपनी सारी बातें एक दुसरे के बांट लेते है ...चाहे वह बाते सपने की हो या हकीकत की.

तीन दिन पहले ही चिट्ठा चर्चा मंच का टेम्पलेट बदला हुआ देखा ..टेम्पलेट की मौलिकता और सुंदरता को देखते हुए अपने इस ब्लॉग पर वही टेम्पलेट लगाने की सोची ...और रात को दो बजे तक जगाकर कोशीश की ...लेकिन मुझे ऐसा लगा कि डा.अमर कुमार जी ने सारा टेम्पलेट HTML जैसे खुद से डिजाइन कर रखे थे अतः मै हथियार डाल कर सो गया ..जबकि मुझे भी HTML का काफ़ी ज्ञान है.

सुबह फ़िर प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुआ क्युकी टेम्पलेट पूर्णतः एक खास तरीके से डिजाईन किया हुआ था....और
इस टेपलेट को किसी फ़्री डाऊनलोड साईट पर ढूंढ पाना मेरे लिये असंभव सिद्ध हुआ. थक हार कर यह प्रयत्न छोड दिया.
डा.अमर कुमार जी को शत शत बार प्रणाम उनके इस ज्ञान के लिए. बहुत जबरदस्त बुनावट की गई थी इसे तैयार करने में.

और मुझे लगा की अब टिप्पू चच्चा को भी हार माननी पडेगी. और सोचा कि चच्चा के इस टेंपलेट युद्ध का अब अंत होगया है.

फ़िर कल ही दोपहर में पता चला कि टिप्पू चच्चा के रोहित ने भी एकदम से वही टेम्पलेट लगा दिया ...चच्चा टिप्पू सिंह और रोहित बबूआ ने मिलकर टेम्पलेट बदल दिया तो मुझे डबल रोना आया अपने इस आधे अधूरे ज्ञान पर ....क्युकी मै तो एकदम से यह मान बैठा था कि यह टेम्पलेट इंटरनेट पर उपलब्ध हो ही नही सकता जबकि चच्चा ने तो डाऊनलोड लिंक ही थमा दिया पोस्ट में.

तो अब आपको भी प्रणाम चच्चा टिप्पू सिंह और आपके भतीजे रोहित को भी.

चच्चा टिप्पू सिंह जी आपसे एक अनुरोध है जब रोहित बबुआ इतना प्रखर बुद्धि का बालक है तो उसके ज्ञान की जानकारी हम कम जानकार लोगों को भी मिलनी चाहिये.तो क्यों ना एक टेक्नीकल ब्लॉग उसको खुलवा दे जिससे हम जैसे अल्प बुद्धी वाले लोग भी कुछ सीख सके.

आप मजे से टिप्पणी चर्चा करते रहे और रोहित बबूआ टेकनिकल चर्चा करते रहें.

rat meetingचूहों की मीटिंग बुलाई गयी है ....सभी जगह से देश-विदेश से चूहे बुलाए गए है..........चूहों का सरदार खडा होता है और अपने चूहे साथियों को संबोधित करते हुए कहता है ....
मेरे प्यारे चूहे साथियो ...आज ये मीटिंग इमरजेंसी में बुलाई गयी है .......साथियो इस मीटिंग में आने केलिए धन्यवाद ........आज की मीटिंग सरकार केखिलाफ मोर्चा खोलने के लिए है ......
प्यारे चूहे साथियो सरकार हमारे साथ नाइंसाफी कर रही है .....सरकार बड़े बड़े कारनामे कर रही है और नाम हम चूहों का खराब कर रही है......अनाज मंडियों में अनाज सरकार की लापरवाही से  सड और नाम हमारा आता है कि हम चूहों ने सारा अनाज खराब कर दिया ......
मेरे चूहे साथियो ...जागो ......जागो वरना यह सरकार और जनता हमें कही का नहीं छोडेगी ....जागो नहीं तो ये सरकार हमें भरे बाजार में बेइज्जत कर देगी ...प्यारे चूहे साथियो .......सरकार हमारे इज्जत का जनाजा निकालना चाहती है ........हमें हमारे कामो से विरक्त कर रही है ....
प्यारे चूहे  साथियो अब नेता भी हमारी बराबरी करने पर उतारू हुए है....हम मिटटी खाकर धरती को खोखला कर रहे है और ये नेता लोग रुपया खाकर देश को खोखला कर रहे है .........
हमारे मौत के सौदागर भरे बाजार में हमें मारने वाले जहरों का इंतजाम कर रहे और सरकार इस पर रोक नहीं लगा रही है ...
चूहे साथियो अब भी वक़्त है संभल जाओ ....सरकार को दिखा देना है कि हम में कितनी ताकत है ......


हमें अपने लड़ाई के लिए आगे आना ही होगा
सरकार के खिलाफ ,विरोध का विगुल बजाना ही होगा ....
चूहों ने सरकार के खिलाफ क्या मोर्चा निकाला पढियेगा आगे
नमस्कार

नमस्कार , जी बोदूराम हाजीर है आज फिर लेकर अपनी शेरो -शायरी की रिपोर्ट ,
हुआ यु की जबसे बोदूराम ने जवाबी शायरी प्रतियोगीता
जीता है पाँव तो जमीन पर है लेकिन मन आसमान में ही विचरण कर रहा है , मुझसे बात करते करते ही वो ट्विट्टर की तरह रिपोर्ट देने लगते है अपने कारनामो की , और मै मरता क्या ना करता , सुन लेता हु आप सबको बताने के लिए ..............


बोदूराम जबसे शायरी में लगे है भाषा भी बदल गयी है , आते ही बोले - अमां मिया पंकज भाई , कैसे है मिजाज .
मै भी उसी लहजे में बोला -
बस ठीक ठाक है जनाब
बोदूराम - अमां तुमने हमारी शायरी वाली बात नहीं सुनी क्या ?


मै बोला - नहीं भाई बोदूराम , बताओ तो सही
yellow_number_2_pencil_with_an_eraser_cartoon_character_talking_to_a_business_manबोदूराम - अमां का बताये पंकज भाई , जबसे अपने गाँव में प्रतियोगिता जीती है सांस नई लेने पा रहा हु .
मै बोला - काहे बोदूराम भाई , कौनो बीमारी है का ?
बोदूराम - अरे नहीं अमां , फुरसत नहीं है ,


मै बोला - अच्छा अच्छा
बोदूराम - कल गया था मौलबी के साथ , मौलबी साहब बोले बेटा बोदूराम , आज भी हमारे पेट में दरद है त थोडा तुम्ही रंग जमा दो ....


सामने वही पाहिले जो हारा था उसका ही एक साथी और वो दोनों थे ........मै तो जाकर बैठ गया ,शामियाने पर और दबा लिया बनारसी पान , और बोल दिया की पाहिले शुरुआत आप ही लोग करे ...........
मै बोला - फिर क्या हुआ बोदूराम जी ?


बोदूराम - अमां होना का था , गर्लफ्रेंड रखने वाले लगते थे , वही शेर मार दिए


चांदनी चाँद से होती है सितारों से नहीं , मोहब्बत एक से होती है हजारो से नहीं


बस का था हम भी इतजार किये बैठे थे जैसे ही अंतिम लाइन ख़तम हुआ , हम शुरू हो गए ......और बोले ......


अमां , चांदनी चाँद से होगी तो सितारों का क्या होगा ?
मोहब्बत एक से होगी तो हजारो का क्या होगा ?


फिर उसने दूसरा शेर मारा -


सच्चाई छुप नहीं सकती , बनावट के उसूलो से , खुशबू आ नहीं सकती , कही कागज़ के फूलो से !!



और ये शेर उसने मौलबी साहब को निशाना करके मारा था , मौलबी साहब थोडा सचेत हुए तो मै बोला , मौलबी साहब आप आराम करे , अभी हम जिंदा है .......


मै भी पलटवार शेर मारा --


सच्चाई छुप सकती है , अगर आपस में मेल हो ..
खुशबू आ सकती है, अगर कागज़ में तेल हो !!!


पंकज जी आपसे बता रहे है इतना सुनते ही पूरा महफ़िल तालियों से गुज उठा ...अब वो बागड़ बिल्ला शायर ने एक भारी शेर मारा और बोला ..


हमें तो अपनो ने लूटा , गैरो में कहा दम था
मेरी किस्ती वहा डूबी, जहां पानी कम था .....


लेकिन मै तुंरत जवाब दिया -


अबे तू तो पहले से ही बेवकूफ था , तेरी बातो में कहा दम था .
वहा क्या करने गया था , जहां पानी कम था ....


इस तरह पंकज जी मै शायरी प्रतोयोगीता जीता , कैसा लगा ?
मै बोला अभी नहीं बताउगा , जब पाठक लोग बातायेगे तब बताउगा .........
अब आप बताइये कैसा लगा ........
(यह पोस्ट सिर्फ हँसी के लिए लिखी गयी है , अगर किसी भी प्रकार के अमर्यादित शब्द दिख रहे हो तो कृपया मुझे बताये )



नमस्कार , आज बात कर रहा हु पते , मतलब पते की बात !
आप को कैसा लगेगा अगर आप के ऊपर कोई उंगली उठाये और आप ब्लॉगर को गलत बताये , बताइये कैसा महसूस करेगे  आप, जब कोई आप को  ये कहे  की  आप ऐसे ब्लॉगर है जो कि किसी के मौत की खबर पर भी शुभकामनाये देते है  ..?
जी हां बात कर रहा हु ब्लॉगर अनुराग आर्य की इन्होने एक जगह ये कमेन्ट दिया है कि आप ऐसे लोगो को क्या कहेगे जो की गौतम राजरिशी के गोली लगने  के बाद भी मेरे यहाँ दशहरा की शुभकामनाये दे कर चले आते है .......और ये बात इन्होने किस लहजे मेंकहा है आप खुद देखिये ..
ये बात अनुराग आर्य ने कहा है निशंतम ब्लॉग पर जो की निशांत मिश्रा द्वारा लिखा जाता है ....इस ब्लॉग पर निशांत ने एक पोस्ट लिखी थी और इन्होने  विवेचना किया है कि भाषा के नाम पर लेकर कुश के टिप्पणी पर जो बहस चल  रही है वो बेकार की है...
इसके बाद इस ब्लॉग पर हमारे कई बड़े वरिस्थ साथियों ने निशांत की इस बात का समर्थन भी किया है , मै कहता हु अगर ऐसा था तो वहा पर मेरे द्वारा भी कुछ प्रश्न पूछ गया था उसका जवाब निशांत या और बाकी समर्थको ने देना उचित क्यों नहीं समझा ...?
क्या आप ब्लॉग पर सिर्फ अपनी मर्जी की बात लिखना जानते है , और जब जवाब देने की बारी आयेगी तो ............!
चलिए ज्यादा इधर उधर की बात न करते हुए मुद्दे पर आते है , निशांत ने अपने ब्लॉग पर पोस्ट लिखी की  कुश की टिप्पणी को लेकर बेकार की बहस और इसी ब्लॉग पर कुछ लोगो ने अपने मन मर्जी टिपियाया भी और सभी ब्लागरो को काफी कुछ कहा जो कि चच्चा टिप्पू सिंह की इस बात(भोजपुरी, हरयाणवी या और किसी क्षेत्रीय भाषा के ब्लाग डिलिट हों : मगरुरवा कहिन !!) !का समर्थन किये थे .
चलिए बात यहाँ तक भी दायरे में थी लेकिन उसी जगह पर ये टिप्पणी  की 

सार्थक बहसों में लोग मौन रहते है या समझदारी भरी चुप्पी ओड कर निकल जाते है .....अपने अपने पूर्वाग्रह को निकालने के बहाने ऐसी निरर्थक बहसों का इस्तेमाल करते है ...दुःख ओर हैरानी के साथ निराशा तब होती है जब इसमें वो ब्लोगर भी होते है जिन्हें सो कॉल्ड वरिष्ट ब्लोगर कहा जाता है ...टिपण्णी इतनी महत्वपूर्ण है ब्लॉग जगत में की कोई किसी को नाराज नहीं करना चाहता .....कभी कभी सोचता हूं यदि गूगल ब्लॉग बन्द करने की घोषणा कर दे .तो ?

चलिए मै यहाँ पर भी  एतराज नहीं जता रहा हु  लेकिन कुछ ही देर बाद अनुराग आर्य की दूसरी टिप्पणी कुछ इस तरह आयी

डॉ .अनुराग ने कहा…
October 16, 2009 6:29 PM

महाभारत में एक कहानी थी ....
"अश्वथामा मारा गया " इसका इस्तेमाल.....यहां वही सीन है.... .गौतम राजरिशी को गोली लगने के बाद मेरी पोस्ट पे लोग दशहरे की शुभकानाये लिख जाते है....आप क्या उम्मीद करगे ......?

अब आप बताइये ऐसी कौन सी पोस्ट थी और आप में से कितने लोग थे जो वहा पर दशहरा के बधाई देकर आये थे और आज आपके उस बधाई सन्देश को यहाँ किसी अन्य  रूप में पेश किया जा रहा है ...
मै ये बात आपसे इसीलिए पूछ रहा हु क्युकी ये बात मै वहा पूछा लेकिन शायद तब तक चौपाल उठ चुकी थी , अब मै ये कैसे कह सकता हु कि उठ चुकी थी  आप खुद देख लो
उसी पोस्ट पर मेरा  कमेन्ट
Mishra Pankaj ने कहा…
October 16, 2009 9:51 PM

डा. साहब गुस्ताखी माफ़ की जाय
क्या आप उस पोस्ट का लिंक यहाँ दे सकते है जहा  पर आपको दशहरे की शुभकामनाये दिया गया है ?
जिस दिन मेजर साहब को गोली लगी थी तो कुश जी ने चर्चा की थी और जब वहा पर लगभग ८ लोग उनके चर्चा  और फार्मेट की तारीफ़ करके आ गए तो उन्होंने आपसे मिली अपडेट लगा दिया तो आप क्या कहेगे ?
क्या वो लोग गलत थे जो पहले सिर्फ कलेवर की क\बखान करके आ गए थे और बाद में जो पहुचा वो मेजर साहब  के शीघ्र स्वास्थय लाभ की कामना किया .
तो आप अब ये बताओ गलती किसकी जो वहा कलेवर की चर्चा करके आया या वो जो बाद में ऐसी खबर एड किया .
क्या वहा पर दूसरी पोस्ट लिखना तर्कसंगत नहीं था ...ऐसे जगह पर तो मेजर साहब के लिए दूसरी पोस्ट लिखनी चाहिए थी .
शायद आपने भी कुछ ऐसा ही किया होगा कि दशहरा के पोस्ट लगाई होगी तो लोगो ने दशहरा की शुभकामनाये दी ....
मेजर साहब से हम सबका लगाव है और इस बगाजग्त का हर बन्दा  मेजर गौतम के शीघ्र स्वास्थय लाभ की कामना कर रहा था दिल से भगवान् को याद कर .....
आपको दीपावली की शुभकामना

और पुनः मै लिखा
Mishra Pankaj ने कहा…
October 16, 2009 9:53 PM

चर्चा का लिंक ये है
http://chitthacharcha.blogspot.com/2009/09/blog-post_23.हटमल

उसके बाद मै पुनः लिखा
Mishra Pankaj ने कहा…
October 17, 2009 9:01 AM

awaiting your response!!!

लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं , मै पूछता   हु अनुराग आर्य से और निशांतम  के लेखक श्री मान निशांत से कि , अगर किसी बहस के सिर्फ एक पहलू को रखना है तो आपने ऐसे पोस्ट क्यों लिखे और अगर आपको अपने कमेन्ट की सफाई नहीं  देनी थी तो ऐसी कमेन्ट क्यों किया , क्या आपकी लिए यह बहस सिर्फ एक दिन का पोस्ट था और आपने किस बेसिस  पर यह बात कही है कि गौतम राजरिशी को गोली लगने के बाद मेरी पोस्ट पे लोग दशहरे की शुभकानाये लिख जाते है....आप क्या उम्मीद करगे ......?
यहाँ भी पोस्ट लिखने का सिर्फ यही     मकसद   है कि  शायद   जवाब मिले ...और आप सभी पाठक   मुझे बताये कि गलती   मेरी है या  ऐसे पोस्ट पर ऐसे कमेन्ट करनेवालो  की ...
नमस्कार
पंकज   मिश्रा

नमस्कार ,


दीपावली बीत गयी, आज नया साल भी हो गया सब कुछ नया रहा नया कपडा , नया रंगरोगन, नए नए शुभकामना सन्देश सब कुछ नया लेकिन कुछ ऐसे पहलू है  कि बदल  नहीं रहा है वो है हमारे भारत की बेचारी बेरोजगारी ,भुखमरी और बीमारी ....
कल दीपावली को हर घर में पूजा हुआ , पटाखे छुडाए गए और मिठाइया बाटी गयी ऐसा आप कह सकते है , क्युकी आपने अपने आस-पास में यही सब देखा है ... काश आप ऐसे भी घर देखते जहा आज भी लोग भूखे सो गए , मरीज पटाखे की आवाज से  परेसान था और बेरोजगार आज भी नौकारी की लालसा में दुखी सो गया......
आज हर घर में दीपावली के दीप जलाए गए और पटाखे और फ़ुल्झडिया छोडे  गए लेकिन मेरे घर पर ऐसे लगभग २० लडके आये  जो की देखने से निहायत ही गरीब और भूखे लग रहे थे ....


खुद तो भूखे थे  लेकिन  दूसरो को पैसे के लालच में दीपावली की शुभकामनाये दे रहे थे ......
सुबह कई लडके हाथ में झोला लेकर  रात के फटे पटाखे में में से सही पटाखे छाट रहे थी .. ऐसे समय में बस यही याद आ रहा था कि जिस तरह हमारे घर की महिलाए दरिद्र खेदने के नाम पर टोटके करती है

काश ऐसा ही कोई टोटका हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह भी करते भारत की दरिद्रता दूर करने के लिए ......

नीचे के चित्र देखिये और बताइये कैसे रही दीपावली ...?
मै तो कहता हु काहे की दीपावली , काहे का नया साल ?
आधा भारत तो भूखा ही  सो गया

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  all foto by google

नमस्कार ,
मै पंकज मिश्रा , आप सबको दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाए ..........
दीपावली आ रही है ,.... समझिये आ ही गयी है , जहा देखिये पटाखे ,बजाये जा रहे है , फ़ुल्झडिया छोडी जा रही , आसमान धुन्ध्मान और वातावरणशोरमय  बनाया जा रहा है .....


सड़क पर सवारियों के ऊपर पटाखे फेके जा रहे है ......गावो में अभी से राकेट छोडने से आग लगना शुरू हो गया है अब आग लगेगा तो घर जलेगा , घर जलेगा तो लड़ाई होगी तो ये कौन से और कैसी दीपावली ......
कभी आपने सोचा है कि आप दीपावाली को कितने पैसे का पटाखा फोड़ते है और उससे हासील क्या होता है .... चंद जोरदार आवाजे ढेर सारा धुँआ और कितनी बात बच्चे तो बच्चे खुद भी आप इसके लपेट में आकर जल  जाते है... किसी केहाथ में फुटका पड़ जाता है तो किसी की आँख कानी होने की नौबत आ जाती है ... ऐसे माहौल में जानबूझकर इस चक्कर में मत आइये और बच्चो के लिए भी सादा दो चार पटाखे ले लीजिये लेकिन ज्यादा पैसा और ज्यादा रिस्क मत लीजिये ...
जैसा कि सब को पता है दीपावली का त्यौहार लक्ष्मी गणेश जी की पूजा के लिए किया जाता है तो पूजा में आवाज और बम पटाखे क्यों ?


क्यों हम जानबूझकर अपने बच्चो को आग से खेलने देते है ?
क्या हासील कर सकते है आप चंद नकली राकेट आसमान में छोड़कर ?
क्या आप के  ज्यादा  आवाज वाले पटाखे बजाने से लक्ष्मी जी खुश होती है ?
आप सब से अनुरोध है कि शांत और शभ्य तरीके से इस त्यौहार को मनाये .........


पंकज मिश्रा 

बोदूराम को शौक चढा शादी करने का , लेकिन समस्या यह है कि शादी करने के लिए कन्या कहा मिले ? एक तय भी किया था रामकटोरी के साथ तो बोदूराम अंगरेजी बोलने के चक्कर में गवां चुके है . अब आगे अपनी उम्र का लिहाज करते हुए फिर से शादी करने की तैयारी में है , पर समस्या यह है कि शादी करने के लिए लड़की कहा से खोजी जाय ..


बोदूराम के गाव में ही एक है पंडित जुगनू प्रसाद जो कि शादी विवाह कराने का पुण्य कम करते है , सुना  है बदले में १००० हजार नकद और शादी में पंडित वही रहेगे इसकी माग करते है .
बोदूराम भी सुबह ही तैयार होकर पहुच गया शादी के लिए पंडित जुगनू प्रसाद के पास.Drinker_3


पंडित जी स्नान करने जा रहे थे , एक जनेऊ कान पर चढा रखा था और गमछा कंधे पर लटक रहा था . बोदूराम प्रणाम करके बैठ गया .
पंडित जी स्नान करके ध्यान  भजन करके वापस आये और बोदूराम से आने का कारण पूछा ...
बोदूराम फफक कर रो पडा , पंडित जी समझ गए और बोले घबराओ मत मै अंधे लूले लंगडे सबका विवाह करवा दिया हु तू तो जवान ओ , रूपवान हो , तुम्हारे लिए तो एक मिनट में लड़की खोज दुगा ..... अच्छा ये बताओ - तुमको रेट पता है ना हमारा ?..
बोदूराम अचकचाया, पंडित जी ने दुबारा दुहराया , अरे भाई दाम शादी करवाने का ?


बोदूराम - हां पंडित जी पता है ना ! दाम घर से आ रहा था तो सरजू प्रसाद तेली ने बताय था .
पंडित जी खुश हुए और बोले -क्या बताया था सरजू प्रसाद ने ?
बोदूराम -मुझसे पूछा कहा जा रहे हो ? मै बताया कि आप के पास आ रहा हु तो कहने लगा चले जाओ है तो अच्छे पंडित यही दाम थोडा ज्यादा लेते है वैसे लड़की भी सुन्दर खोजते है ...
पंडित जी गुस्से में आकर बोले - ससुर सरजू प्रसाद  तो हमारे जैसन रहल की उनके जैसे बुडबक का शादी कराई देहली औ हमही के गरियावत बा ?


बोदूराम पंडित जी को शांत कराने की गरज से बोले - हां पंडित यही बात हम भी उससे बोले थे ..
पंडित जी बोदूराम से बोले - बोदूराम तुम मुझे नेक जान पड़ते हो इसीलिए तुम्हे एक मौका और देते है .. चलो बताओ पढी लिखी औरत चाहिए या गाव की अनपढ़ औरत ?
बोदूराम - पंडित जी पहले ये बता दीजिये दोनों में फर्क का है ?
पंडित जी- फर्क तो बहुत है लेकिन दो तीन बता रहा हु उसमे ही समझ जाओ ..सबसे पहले मान लो तुम अस्पताल में भरती हो और अगर पढी लिखी औरत जायेगी तो कैसे बात करेगी ?


पहले तो वो तुम्हारे लिए फल लेकर जायेगी और बोलेगी - घबराइये मत , डाक्टर से बात कर ली हु दो दिन में आराम आ जाएगा और तुम्हे छुट्टी मिल जायेगी ......ओ के .....
और अगर गाव की अनपढ़ औरत जायेगी तो -
जाते ही पहले तो अस्पताल तक पहुचने में हुई कठिनाई का विस्तार पूर्वक वर्णन करेगी फिर बोलेगी .....अरे बाप रे बाप इतना दुबले हो गए क्या सूरत बना राखी है ... कब तक ठीक होगा ये सब ......कुछ खाते पीते भी हो या नहीं ?............
मतलब की बीमारी को और बढा देगी ..


मरीज बोलेगा - घबराओ मत कल तक आराम आ जाएगा और दो तीन दिन के अन्दर छुट्टी मिल जायेगी
औरत - अरे ख़ाक छुट्टी मिल जायेगी यही रोग भूलन के लडके को हुआ था ऐसे ही डाक्टर टोल-मटोल कर रहे थे कल अचानक बाथरूम में घुसा निकला ही नहीं , उधर ही साफ़ .....
बोदूराम - पंडित जी ये तो बहुत सोच विचार करके फैसला करना होगा खैर दूसरा बताइये ..
शादी  के बाद मिया बीबी में झगडा होता है . अगर पढी लिखी बीबी रहेगी तो तुम्हे १० मिनट में झगडा करके फ्री कर देगी ऐसे ...
बोलेगी , देखो जी रोज रोज देरी से आते हो आपका आदत खराब हो  रही है , कल लगा की पी के आये हो , ये सब अच्छा नहीं है , आप मान जाओ नहीं तो मै पापा के घर चली जाउगी.......this is not fare ....
और अगर  गाव की अनपढ़ बीबी रहेगी तो ?


झगडा करने के आधे घंटे पहले से हीटर की तरह गरम रहेगी और देखते ही टूट पढेगी ..
आ गए अरे करम फूटी थी हमारी जो तुम जैसे के पाले पडी ,, हे भगवान् मैंने इससे शादी क्यों की ?
पति - अरे ये बात अब क्यों पूछती है ये तो शादी के पहले पूछना चाहिए था ना ?
पत्नी - अरे नासपीटे कहा मुह काला करके आया ? किसकी गोद में मेढक की तरह फुदक कर आया है ...
पति - मेरी माँ आधा घंटा लेट हु और आधे घंटे में ऐश नहीं करके आया हु ट्राफिक में फस गया था ..
पत्नी - हा हा बना लो बहाना जैसे कि मै जानती नहीं हु ये सब , जानते नहीं मै कौन हु ?
पति -   ना तो जानता हु और ना जानने की जरुरत हां इतना जरुर जानता हु न तो तू प्रधान मंत्री की बेटी है और ना ही मुख्यमंत्री की बहन --beer_drinker_animation


बोदूराम ने पंडित जी के पाँव छुए और १० रुपये भेट दिया और बोला पंडित जी आपने ऐसी बातें बतायी है कि मुझे पुनः सोचना पडेगा , मै आपसे दुबारा मिलाने आउगा ,
नोट - यह पोस्ट सिर्फ हँसी के लिए लिखा गया है इसे अन्यत्र ना ले !!

नमस्कार की जगह आदाब , ब्लॉग की जगह महफ़िल , पोस्ट की जगह मुशायरा , टिप्पणी की जगह वाह वाह !!!
बस ऐसा है हमारा आज का अंदाज़ !

तो जनाब आदाबे अर्ज़ है कि ,
महफ़िल  में आ गए वो अपने नसीब से ,.... गौर फरमाइयेगा ......
महफ़िल में आ गए वो अपने नसीब से , महफ़िल में आ गए वो अपने नसीब से .
छोडिये , अगर आ ही गए है तो बैठने दीजिये ,,,,,

ये तो बस एक नज़्म था हमारे बोदूराम जी का , हुआ यु कि आज हमारे गाव में जबाबी शायरी की प्रतियोगिता थी और एन  मौके पर हमारे मौलबी साहब जो कि हमारे गाव की नाक है शेरो शायरी के मामले में उनकी तबियत नासाज़ हो गयी .

अब तबियत नासाज़ हो गयी मौलबी   साहब की  लेकिन भुगतना पडा बोदूराम को  कैसे ? अरे साहब आप शायद भूल रहे हो गाव में जब जब कोई मुसीबत आयी है बोदूराम को ही मदद के लिए बुलाया गया है , इसके पहले भी एक बार बोदूराम जे गाव की तरफ से अंगरेजी गाना गा चुके आप में से कई लोग तो पढे भी है ,जो नहीं पढ़े है यहाँ जाकर पढ़ ले ....

शायरी शुरू हुआ , सामने से नामचीन शायर अपनी शायरे पढ़ रहे थे . mehfil
पहले शायर ने खड़े होते ही बोदूराम को निशाना करके शायरी मारा .
आये हो जनाब , महफ़िल में , ये तो दिखा रहा है ,
पर मै तो पहले आपको कही देखा नहीं  था
शेर सुनने आये हो शायद ? अच्छी बात है
पर सुनने वालो के लिए , बैठने का अलग इंतजाम है
.
बोदूराम सन्न जवाब क्या दे , बस बोल पडा ...
ना तो तू शायर है और ना ही शायर का  भतीजा है ..
ना तो तू शायर है , और ना ही शायर का भतीजा ..
तू तो सिर्फ मेरी , एक भूल का नतीजा है ....

सामने से आये हुए पहलवान मौन धारण कर लिए और निकल पड़े .
अब बारी आयी दुसरे पहलवान की मतलब शायर बाज की , जो कि अभी नयी नयी लेटेस्ट टेक्नालाजी की शायरी शुरू किये है . आते ही फायर किया .

ना तो तेरी जात है शायर की ,
ना तो तेरी औकात है शायर की ,
बोदूराम बोले , आओ मौलबी साहब सुनाते है अपनी जात पात शायर की .....


मै चाहू तो खोल दू दो मिनट में अपनी जात , दिखा सकता हु तुझे अपनी औकात ...
मगर मै ऐसा नहीं करूगा , जानता है क्यों ....
मै इज्जत नहीं करता तेरे जैसे शायर की ....
तू तो है औलाद किसी कायर की ...
उस शायर की पिछली  महफ़िल में किसी से सवा जवाब में झगडा हुआ था तो बोदूराम ने दो और लाइन जोड़ दी ...
तुने बोया है बीज ऐसा जिस पर अभी तक लड़ा जा रहा है ......
तुने बोया है बीज ऐसा जिस पर अभी तक लड़ा जा रहा है ......
तेरे नाम पर जगह जगह  गालियों के कसीदे  पढा जा रहा है ....!

मै जो भी शेर बोलता हु , तुम उसको भी काट देते हो ..
इतना सुनना था कि वो नवा शयरबाज़ बहुत खुश हो गया ....
बोदूराम ने आगे की लाइन पढी ..
मै जो शेर बोलता हु वो तुम कट देते हो ,
मै थूक देता हु , और तुम चाट लेते हो .....

वो पहलवान भी  चुप्प !!


इस तरह बोदूराम को हमारे गाव के सवाली जवाबी शायरी प्रतियोगिता में विजय प्राप्त हुई .
मै ये खबर लिख ही रहा था कि बोदूराम का मेल आया .
पंकज जी ये शेर आपके लिए इसको भी अपने ब्लॉग पर जगह दीजियेगा ...
शायरी कहना  खेल नहीं है बच्चो का ...
तेल निकल जता है , अच्छे  अच्छो का.............
कैसा लगा हमारा ये नवीन शायरी शौक ?

नमस्कार , आज एक नया किस्सा बोदूराम का .

बोदूराम जब से ताऊ आश्रम से आया है बहुत चिंतित रहता है,

एक दो बार बार नौकरी पानी में भी हाथ आजमाने के बाद बोदूराम निराश हो चुके थे .
दिन रात नदी किनारे , मंदिर में , हर जगह जहा भी रहते सोच से ग्रसित रहते थे .
घर वाले परेशान करे तो क्या करे .
कई बार घर वाले जानना भी चाहे मगर कुछ पता नहीं कर पाए .
एक दिन बोदूराम की माँ बोली - बेटा तू हमेशा सोचता रहता है और ये सेहत के लिए अच्छा नहीं अगर ऐसा ही है तो तू एक काम कर सोचने के लिए एक आदमी रख ले वो तेरे बारे में सोचेगा .



बोदूराम को भी आईडिया पसंद आया , तुंरत बाजार गया था १०० पम्पलेट छपवा लाया जिस पर लिखा था -

सोचने के लिए एक उम्मीदवार चाहिए , उम्र १८ से ३४ के बीच शिक्षा बी काम होना अनिवार्य .
रहने खाने तथा मोटी तनख्वाह दिया जाएगा . जो कोई अपने आप को सोचने के काम के योग्य समझता हो संपर्क करे .
बोदूराम


अगले दिन ही १०० से ज्यादा उम्मीदवार आ गए नौकरी के लिए बोदूराम ने उसमे से एक को चुना .
नाम था रमेश शिक्षा एम् बी ए फ्राम झारखण्ड .



बोदूराम ने पूछा , हा रमेश जी आप हमारे लिए सोचेगे ?
रमेश- सोचेगे ना साहब दिन रात सोचेगे , सुबह शाम सोचेगे
सोते जागते सोचेगे ,हसते रोते ,खाते पीते .
हमेशा आपके लिए सोचुगा .




पर साहब एक बात बताइये आप मुझे पगार कितनी दोगे ?
बोदूराम -२५ हजार हर महीने .



चलो रमेश अब एक बात मै तुम्हे सोचने का मौका देता हु इससे हमारा तुम्हारा सबका फायदा होगा .

रमेश- बताइये सर .
बोदूराम- मेरी महीने की कमाई ५ पैसा भी नहीं है और मै तुम्हे २५ हजार दुगा . कहा से ?


रमेश - कहा से दोगे सर

बोदूराम- बस रमेश यही सोचकर बता दो पैसा ले जाओ .


नमस्कार ,
कल अजीब घटना हो गयी हमारे यहाँ बोदूराम ने बगल के गाव के चौधरी बिरादरी के लोगो को गाली गलौज दे दिया , और वहा से चलता बने .


गाली गलौज देने के नाते चौधरी बिरादरी के कुछ नौजवान लाठिया लेकर हमारे गाव की तरफ आने लगे .
बोदूराम भागा भागा आया और सारा हाल मुझे कह सुनाया . मैंने मौके की नजाकत को देखते हुए बोदूराम को घर के अन्दर छुपा लिया और ये कहकर उन सबको वापस भेज दिया कि मै बोदूराम से बात करुगा .



चौधरी विरादरी तो किसी तरह वापस चली गयी लेकिन हमारे खेमे के ही कुछ बेवकूफ नौजवान लोग मुझे भड़काने लगे ,
बोले अरे काका ऐसा क्या कर दिया बोदूराम ने , बस यही तो बोला था कि अपने औकात में रह कल का पैदाइश मेरे सामने आया है बात करने . बस यही तो बोला था बोदूराम ने .
मै बोला पर क्यों बोला था अब वो लोग भड़क रहे है उसका क्या ?
बोदूराम बोला - काका , मै तो बस यही बोला था कि अपनी औकात में रह
मै बोला - तो तुने अब उनकी औकात देख ली घर तक चढ़ आये थे लाठी लेकर , अब देख औकात और दिखा औकात .

चौधरी बिरादरी ने पंचायत बुलाया , मै भी गया

पंचायत बैठी लोगो ने बोला कि बोदूराम को बुलाया जाय , अमी बताया कि बोदूराम के पेट में दर्द है इसीलिए नहीं आया मै आया हु उसकी तरफ से .
पंचायत ने अपनी बात रखी, मै भी सफाई देने के लिए खडा हुआ . मै बोला - बोदूराम को माफ़ किया जाय बच्चा है नादाँ है बेवकूफ है . वह पिछले १० साल से गाव में रहता है .
चौधरी बिरादरी के एक बुद्धे खड़े हुए और बोले - तो क्या हुआ हम तो यहाँ ८० साल से रह रहे है उसने गाली कैसे दी ?
मुझे बोदूराम से हिसाब चाहिए , जब तक माफी नहीं मागेगा , हम मानाने वाले नहीं है .

मै भी सोचा ये लोग हमारा कर ही क्या सकते है अतः बोल दिया कर लो जो करना हो बोदूराम माफी नहीं मागेगा .
तो ठीक है आज के बाद जो भी चौधरी विरादरी का आदमी आपके गाव के तरफ से जाएगा हर रोज यहाँ पंचायत भवन पर आकर बोदूराम को दो गाली देकर जाएगा , तुम्हे जो करना हो कर लेना .
मै चक्कर में पद गया लेकिन किया क्या जा सकता था , किसी तरह वहा से जान बचाकर भागा .


घर आया और टूट पडा बोदूराम पर लगा मारने लेकिन कही से मेघू प्रसाद आ गए औ बोले कि मत मारो काका इसने क्या गलत किया है वो साले चौधरी बिरादरी वाले है हे ऐसे उन्हें क्या पडी थी गाव छोड़कर दुसरे गाव में जाकर रामलीला देखने की , मेढक है तो कुए में ही रहना चाहिए समुन्द्र में आने का ख्वाब नहीं देखना चाहिए .
मेरा मन हो रहा था खीच कर मारू दो हाथ बोदूराम को और चार हाथ मेघू प्रसाद को ,ऐसे घटिया प्रवचन के लिए .


मै तुंरत निश्चय किया और बोदूराम को लेकर पहुच गया पंचायत ,पंच के सामने माफी मगवाया और मामला रफा दफा किया .
आज मेरा बोदूराम और चौधरी विरादरी का गाव एक दुसरे से मेल मिलाप से रहते है .


हिल मिल कर रहिये यही कामना है !!!

नमस्कार , मै पंकज मिश्रा आप के साथ अपने इस खाश पोस्ट में.

खाश इसीलिए कि मै इस पोस्ट में जिस शख्श की बात करने जा रहा हु उसे कही से भी इसकी जरुरत नहीं है ऐसा मुझे महसूस होता है . वह हम सबको जानता है और हमारे द्वारा किये गए पोस्ट को भी पढ़ता है . टिप्पणिया नहीं करता लेकिन आप के द्वारा किये गए टिप्पणियों की चर्चा जरुर करता है .

जी हां आपने सही पहचाना मै बात कर रहा हु , हमारे ब्लागजगत के एक मात्र टिप्पणी चर्चाकार " चच्चा टिप्पू सिंह जी की "

चच्चा टिप्पू सिंह जी हमेशा से निर्विवाद चर्चा करते आये है और उन्होंने अपने ब्लाग पर बहुत पहले लेख दिया था कि अगर आप में से कोई यह चाहता है कि आप द्वारा की गई टिप्पणियों की या आपकी चर्चा ना हो तो आप मुझे बता सकते है मै उन्हें कभी भी अपनी इस टिप्पणी चर्चा में शामिल नहीं करुगा . यह चच्चा द्वारा घोषित और पालन किया जाने वाला एक उच्च नैतिकता का नियम था.

खैर ये बात तो हो गयी चच्चा की तरफ से और दूसरी तरफ मै बात कर रहा हु अपनी खुद की .

मैने ब्लागिंग शुरू की, लिखता और सुबह सभी चर्चा ब्लॉग पर जाकर देखता कि कही मेरी भी पोस्ट कि चर्चा हुई है क्या? लेकिन चर्चा होना तो दूर, कुछ और ही हुआ रहता था . हर हफ्ते किसी ना किसी ब्लागर का जनाजा निकालते दिखे, कुछ हमारे चर्चाकार बंधू . और उसी लपेट में एक दिन उन्होंने गलती से साँप के मुह में हाथ डाल दिया यानि चच्चा टिप्पू सिंह के ब्लॉग पर .

हालांकि कि इससे पहले भी इससे ज्यादा ज्यादा मौज लिया गया है इन लोगो द्बारा, लेकिन पीड़ित पक्ष सिर्फ अपना विरोध दर्ज कराकर चुप हो जाता था और उसको जिस मंच से बेईज्तज किया जाता था वहां पर ही अगले दिन एक सफाई पत्र थमा दिया जाता था .

पीड़ित ब्लॉगर को कुछ लोग जाकर समझाते कि अरे भाई आप क्यों परेशान होते हो ये तो उनकी आदत है. वैसे वो दिल के नेक इंसान है . जैसे चचा टिप्पू सींह को भी समझाया गया.

ज्यादा बात आगे बढ़ती तो अगले दिन ही दूसरी चर्चा करके इति श्री कर दिया जाता था . पीड़ित और हताश ब्लॉगर ये सोचकर चुप रह जाता कि जाने दो नहीं तो कल से ये सारे के हमारे ब्लॉग पर आयेगे भी नहीं .

लेकिन धन्य हो चच्चा टिप्पू सिंह जी आप धन्य हो !

आपने इनको जवाब दिया है और ऐसा दिया है कि ना तो लीलते बन रहा है और ना निगलते ही . ब्लॉग जगत के कुछ ब्लॉगर अपने ब्लॉग पर बैठे बैठे ही दुसरे की भावनाओं को जान जाते है और बताते है कि भावनाए गलत नहीं होनी चाहिए . लेकिन चच्चा टिप्पू सिंह जी ने अपनी बात पकड़ ली है . भूले बिसरे गीत बोले जाने की . अब अगर लोगो का ये कहना है कि बालक है बालक नादानी कर दिया तो चचा ने भी करारा जवाब दिया है कि अगर बालक नादाँ है तो अपने लोगो पर पत्थर उछाले . और मै भी इसी बात से सहमत हु कि अगर नादाँ है तो आप समर्थको पर पत्थर क्यों नहीं उछलता ?

चच्चा टिप्पू सिंह जी मै खुले तौर पर आपके साथ हु , वैसे ये भी पता है मुझे कि आपको किसी के साथ की जरुरत नहीं है फिर भी अपना भतीजा मानकर मुझे अपना चच्चा कहने से वंचित मत करिए . मै आपको और आपके द्बारा चलाये गए इस गांधीवादी मुहीम की समर्थन करता हु . और आपके द्वारा बनाए गए नियंमो का पालन करुगा .

आपने एक स्वस्थ विरोध की प्रक्रिया शुरु की है, इसमें हर ब्लागर आपके साथ है, अभी शायद कई लोग खुलकर सामने नही आये हैं जो की जल्दी ही आयेंगे. हमें भी अजय झा जी की तरह टिप्पणी चर्चा करने वाले समूह मे शामिल करने की मेहरवानी करें. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपके ब्लाग नैतिकता नियमों का पालन करते हुये टिप्पणी चर्चा किया करुंगा.


और बाकी सभी से बस यही कहना है ,

अभी आये , अभी बैठे , अभी दामन सम्भाला है ,!
आप भी क्या याद रखोगे , चचा ने क्या दम निकाला है .!!

टिप्पू चच्चा आपकी जय हो !!

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श्री गुरुवे नमः

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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