अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

rat meetingचूहों की मीटिंग बुलाई गयी है ....सभी जगह से देश-विदेश से चूहे बुलाए गए है..........चूहों का सरदार खडा होता है और अपने चूहे साथियों को संबोधित करते हुए कहता है ....
मेरे प्यारे चूहे साथियो ...आज ये मीटिंग इमरजेंसी में बुलाई गयी है .......साथियो इस मीटिंग में आने केलिए धन्यवाद ........आज की मीटिंग सरकार केखिलाफ मोर्चा खोलने के लिए है ......
प्यारे चूहे साथियो सरकार हमारे साथ नाइंसाफी कर रही है .....सरकार बड़े बड़े कारनामे कर रही है और नाम हम चूहों का खराब कर रही है......अनाज मंडियों में अनाज सरकार की लापरवाही से  सड और नाम हमारा आता है कि हम चूहों ने सारा अनाज खराब कर दिया ......
मेरे चूहे साथियो ...जागो ......जागो वरना यह सरकार और जनता हमें कही का नहीं छोडेगी ....जागो नहीं तो ये सरकार हमें भरे बाजार में बेइज्जत कर देगी ...प्यारे चूहे साथियो .......सरकार हमारे इज्जत का जनाजा निकालना चाहती है ........हमें हमारे कामो से विरक्त कर रही है ....
प्यारे चूहे  साथियो अब नेता भी हमारी बराबरी करने पर उतारू हुए है....हम मिटटी खाकर धरती को खोखला कर रहे है और ये नेता लोग रुपया खाकर देश को खोखला कर रहे है .........
हमारे मौत के सौदागर भरे बाजार में हमें मारने वाले जहरों का इंतजाम कर रहे और सरकार इस पर रोक नहीं लगा रही है ...
चूहे साथियो अब भी वक़्त है संभल जाओ ....सरकार को दिखा देना है कि हम में कितनी ताकत है ......


हमें अपने लड़ाई के लिए आगे आना ही होगा
सरकार के खिलाफ ,विरोध का विगुल बजाना ही होगा ....
चूहों ने सरकार के खिलाफ क्या मोर्चा निकाला पढियेगा आगे
नमस्कार

27 comments:

  1. विनोद कुमार पांडेय on October 31, 2009 at 7:45 AM

    चर्चा ज़रूरी है सरकार पर अब आदमी लोग तो कुछ सोचने से रहे उन्हे फ़ुर्सत ही नही है कुछ सोचने की तो चूहों ने ही यह ज़िम्मेदारी उठा ली...वैसे अब तो आदमियों को भी जाग जाना चाहिए...बढ़िया और मजेदार चर्चा...धन्यवाद पंकज जी

     
  2. श्यामल सुमन on October 31, 2009 at 8:05 AM

    कहा आपने ठीक ही नेता चूहा एक।
    चूहे को तो ज्ञान कुछ नेता बिना विवेक।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    www.manoramsuman.blogspot.com

     
  3. Anil Pusadkar on October 31, 2009 at 8:57 AM

    सरकार को अब चूहे ही निपटा सकते हैं,हो सकता है किसी दिन सुनाई दे कि मंत्रालय प्लेग की चपेट में।

     
  4. ललित शर्मा on October 31, 2009 at 9:04 AM

    चुहे के पीछे-चुहिया भी दौडे आई
    बचाओ-बचाओ पीछे पड़ी है बिलाई
    चुहा समाज ने तत्काल प्रदर्शन करके
    बिलाई को अपनी ताकत दिखलाई
    बधाई-बढिया सभा कराई

     
  5. पी.सी.गोदियाल on October 31, 2009 at 9:09 AM

    हम हिन्दुस्तानियों से अधिक जागरूकता अगर जिन चूहों में है, तो मेरा सबसे पहले उनको सलाम ! और साथ ही इस नेक कार्य मेरा उनको पूरा समर्थन !

    और कहीं पे निगाहें, कही पे निशाना साधने के लिए आपका भी शुक्रिया !

     
  6. महफूज़ अली on October 31, 2009 at 10:30 AM

    bahut hi sateek vyang..... yeh choohe yahan democracy hai....

     
  7. अर्शिया on October 31, 2009 at 1:57 PM

    जागो भई जागो।
    --------
    स्त्री के चरित्र पर लांछन लगाती तकनीक।
    चार्वाक: जिसे धर्मराज के सामने पीट-पीट कर मार डाला गया।

     
  8. ताऊ रामपुरिया on October 31, 2009 at 2:16 PM

    बहुत लाजवाब व्यंग.

    रामराम.

     
  9. राज भाटिय़ा on October 31, 2009 at 2:53 PM

    सच मै हमे लालच ने चुहा बना दिया, वरना यह कुछ नेता को कुछ गुंडे हम पर केसे राज कर सकते है?आप ने बहुत सुंदर लिखा, धन्यवाद

     
  10. ओम आर्य on October 31, 2009 at 4:06 PM

    बहुत ही सुन्दर और सटिक लेख है .........बेहद सुन्दर बात कही है !

     
  11. रश्मि प्रभा... on October 31, 2009 at 4:08 PM

    चूहे की सफलता के लिए करबद्ध प्रार्थना है

     
  12. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on October 31, 2009 at 4:44 PM

    चूहों की मीटिंग बहुत बढ़िया है।
    चर्चा में आने काबिल है।
    बधाई!

     
  13. anil sharma on October 31, 2009 at 10:42 PM

    व्यंग पढ़कर मजा आया आज कल के हालत यही है , शायद आपका व्यंग कोई नेता पढ़े तो उसे कुछ समझ आये

     
  14. सैयद | Syed on October 31, 2009 at 10:49 PM

    चूहों आगे बढो.. हम तुम्हारे साथ हैं....

     
  15. शरद कोकास on November 1, 2009 at 12:57 AM

    मुझे अल्वेयर कामू का उपन्यास "प्लेग" याद आ गया । ऐसे ही एक मोर्चे का वहाँ वर्णन है ।

     
  16. M VERMA on November 1, 2009 at 5:31 AM

    इस हक की लडाई के लिये मेरा भी समर्थन
    चूहो की एकता जिन्दाबाद

     
  17. अविनाश वाचस्पति on November 1, 2009 at 9:27 AM

    चूहे तो वैसे भी ब्‍लॉगिंग के आने से खूब दुखी हैं। उन्‍हें कुतरने के लिए पुस्‍तकों के उत्‍पादन में गिरावट जो आई है। पर चूहे आखिर चूहे हैं और सच्‍चे चूहे वे होते हैं जो कुतरने को कुछ न मिले तो अपने दांत ही आपस में घिसकर काम चला लेते हैं। पर उफ तक नहीं करते। नहीं रोते प्रकाशकों की तरह पाठकों की कमी का रोना। चूहे इसलिए अच्‍छे होते हैं।

     
  18. चच्चा टिप्पू सिंह on November 1, 2009 at 12:09 PM

    आपकी पोस्ट या आपके द्वारा कहीं भी की गई टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा ब्लाग पर हमारे द्वारा उल्लेखित किया गया है या भविष्य मे किया जा सकता है।


    हमारे ब्लाग टिप्पणी चर्चा का उद्देष्य टिप्पणीयों के महत्व को उजागर करना है। और आपको शामिल करना हमारे लिये गौरव का विषय है।


    अगर आपकी पोस्ट या आपकी टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा मे शामिल किया जाना आपको किसी भी वजह से पसंद नही है तो कृपया टिप्पणी के जरिये सूचित करें जिससे भविष्य मे आपकी पोस्ट और आपके द्वारा की गई टिप्पणियो को आपकी भावनानुसार शामिल नही किया जायेगा।


    शुभेच्छू
    चच्चा टिप्पू सिंह

     
  19. चच्चा टिप्पू सिंह on November 1, 2009 at 12:09 PM

    आपकी पोस्ट या आपके द्वारा कहीं भी की गई टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा ब्लाग पर हमारे द्वारा उल्लेखित किया गया है या भविष्य मे किया जा सकता है।


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    शुभेच्छू
    चच्चा टिप्पू सिंह

     
  20. Apoorv on November 1, 2009 at 12:29 PM

    अगर चूहे अपना कोई प्रतिनिधि लोकसभा मे उतारने के लिये विचार कर रहे हैं तो हमारा एक वोट पक्का समझा जाय... ;-)

     
  21. दिगम्बर नासवा on November 1, 2009 at 1:56 PM

    to choohe bhi ab raajneeti karne lage hain .......... bahoot achhe bhai vo kyon peeche rahen .... agli post ka intezaar rahega ...

     
  22. Udan Tashtari on November 1, 2009 at 10:24 PM

    अब भी वक़्त है संभल जाओ...जिन्दाबाद!!

     
  23. Murari Pareek on November 3, 2009 at 10:50 AM

    सचमुच चूहों के माध्यम से जो आपने इतना गहरा व्यंग किया है| वो बिलकुल सत्य है !! बिचारे चूहों पर इल्जाम!!!

     
  24. बी एस पाबला on November 3, 2009 at 6:59 PM

    इस टिप्पणी के माध्यम से, सहर्ष यह सूचना दी जा रही है कि आपके ब्लॉग को प्रिंट मीडिया में स्थान दिया गया है।

    अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं।

    बधाई।

    बी एस पाबला

     
  25. Rakesh Singh - राकेश सिंह on November 4, 2009 at 9:37 PM

    बिलकुल सार्थक और सटीक व्यंग |

     
  26. महावीर on November 11, 2009 at 5:36 AM

    बहुत सुन्दर और गहरा व्यंग्य है. बधाई.
    महावीर शर्मा

     
  27. dinesh on December 25, 2009 at 9:24 PM

    Chuho Ka Jagna muze bahoot accha laga but.......Hum log educated hot hue bhi Q Aaankhe band kar In Netao ke piche-Piche Dod rahe hai? Ek din ke liye hath jodkar 4 saal 364 din apne ko hath jodne ko majboor karne vale ko In CHUHO se kuch sikhna chahiye. Bahoot accha likha. Thanks.

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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