अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

ब्लॉग एक ऐसा चौपाल हो गया है जहा पर हम अपनी सारी बातें एक दुसरे के बांट लेते है ...चाहे वह बाते सपने की हो या हकीकत की.

तीन दिन पहले ही चिट्ठा चर्चा मंच का टेम्पलेट बदला हुआ देखा ..टेम्पलेट की मौलिकता और सुंदरता को देखते हुए अपने इस ब्लॉग पर वही टेम्पलेट लगाने की सोची ...और रात को दो बजे तक जगाकर कोशीश की ...लेकिन मुझे ऐसा लगा कि डा.अमर कुमार जी ने सारा टेम्पलेट HTML जैसे खुद से डिजाइन कर रखे थे अतः मै हथियार डाल कर सो गया ..जबकि मुझे भी HTML का काफ़ी ज्ञान है.

सुबह फ़िर प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुआ क्युकी टेम्पलेट पूर्णतः एक खास तरीके से डिजाईन किया हुआ था....और
इस टेपलेट को किसी फ़्री डाऊनलोड साईट पर ढूंढ पाना मेरे लिये असंभव सिद्ध हुआ. थक हार कर यह प्रयत्न छोड दिया.
डा.अमर कुमार जी को शत शत बार प्रणाम उनके इस ज्ञान के लिए. बहुत जबरदस्त बुनावट की गई थी इसे तैयार करने में.

और मुझे लगा की अब टिप्पू चच्चा को भी हार माननी पडेगी. और सोचा कि चच्चा के इस टेंपलेट युद्ध का अब अंत होगया है.

फ़िर कल ही दोपहर में पता चला कि टिप्पू चच्चा के रोहित ने भी एकदम से वही टेम्पलेट लगा दिया ...चच्चा टिप्पू सिंह और रोहित बबूआ ने मिलकर टेम्पलेट बदल दिया तो मुझे डबल रोना आया अपने इस आधे अधूरे ज्ञान पर ....क्युकी मै तो एकदम से यह मान बैठा था कि यह टेम्पलेट इंटरनेट पर उपलब्ध हो ही नही सकता जबकि चच्चा ने तो डाऊनलोड लिंक ही थमा दिया पोस्ट में.

तो अब आपको भी प्रणाम चच्चा टिप्पू सिंह और आपके भतीजे रोहित को भी.

चच्चा टिप्पू सिंह जी आपसे एक अनुरोध है जब रोहित बबुआ इतना प्रखर बुद्धि का बालक है तो उसके ज्ञान की जानकारी हम कम जानकार लोगों को भी मिलनी चाहिये.तो क्यों ना एक टेक्नीकल ब्लॉग उसको खुलवा दे जिससे हम जैसे अल्प बुद्धी वाले लोग भी कुछ सीख सके.

आप मजे से टिप्पणी चर्चा करते रहे और रोहित बबूआ टेकनिकल चर्चा करते रहें.

23 comments:

  1. दिगम्बर नासवा on November 1, 2009 at 6:35 PM

    बात तो सही है ... कुछ ज्ञान हमको भी मिल जाएगा.........

     
  2. Arvind Mishra on November 1, 2009 at 6:39 PM

    इसलिए ही मैं पंकज आपसे बार बार पूंछता हूँ न की आखिर ई चाचा कौन हैं ! अब वो त चचा खैर हई हैं !

     
  3. संगीता पुरी on November 1, 2009 at 6:51 PM

    आप सही कह रहे हैं .. ज्ञान बांटना ही चाहिए !!

     
  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on November 1, 2009 at 6:55 PM

    सुन्दर पोस्ट के लिए बधाई!

     
  5. ललित शर्मा on November 1, 2009 at 7:13 PM

    ई राज का बात है चचा कउन है-अरविंद जी को बताएं तो हमे भी पता चले।

     
  6. Ratan Singh Shekhawat on November 1, 2009 at 7:50 PM

    बात तो सही कही पंकज जी आपने | आपकी सलाह टिप्पू चच्चा मान जाये तो रोहित बबुआ की प्रतिभा का लाभ सभी को मिल सकता है |

     
  7. Udan Tashtari on November 1, 2009 at 8:00 PM

    रोहित बबुआ की ज्ञानवार्ता, (सिर्फ नाम सजेस्ट करने चले आये) :)

     
  8. अजय कुमार झा on November 1, 2009 at 8:15 PM

    हम तो नहिंये हैं....(मानो या ना मानो)....

    ऊ का कहते हैं..डिस्क्लेमरवा.....
    अपनी अपनी श्रद्धा के अनुसार सच का सामना किया जाए...नहीं तो पोलीग्राफ़ी मशीन से पूछा जाए....सुने हैं कि रेस्ट कर रही है...मशीन जी और कौन...
    वैसे रोहित जीनियस है...चचा के साथ है न ...

     
  9. cmpershad on November 1, 2009 at 8:50 PM

    ".टेम्पलेट की मौलिकता और सुंदरता को देखते हुए अपने इस ब्लॉग पर वही टेम्पलेट लगाने की सोची "

    क्यों? इस टेम्पलेट में क्या बुराई है जो बदलने की सोच रहे हो:)

     
  10. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on November 1, 2009 at 8:54 PM

    हमारा भी इन विभूतियों को सलाम।

     
  11. Anil Pusadkar on November 1, 2009 at 9:30 PM

    हमारा भी सलाम तकनीक के महारथियों को।

     
  12. ताऊ रामपुरिया on November 1, 2009 at 10:15 PM

    बडी गहरी तकनीक की बात पता चली. आभार.

    रामराम.

     
  13. ताऊ रामपुरिया on November 1, 2009 at 10:16 PM

    बडी गहरी तकनीक की बात पता चली. आभार.

    रामराम.

     
  14. HEY PRABHU YEH TERA PATH on November 1, 2009 at 10:50 PM

    हिन्दी चिठठाकारीता फले-फुले!!
    आपका लेखन प्रकाश की भॉति
    दुनिया को आलोकित करे!!
    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    जय ब्लोग- विजय ब्लोग
    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
    पंकजभाई!!
    चिठठाचर्चा V/S टिप्पणी चर्चा
    टेम्पलेटचर्चा शुरु करने का विचार हो तो कुछ सोचा जाऍ।
    रोहित बबुआ को टीप्पु चच्चा से माग लेगे!!


    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
    हे प्रभू यह तेरापन्थ को पढे
    अणुव्रत प्रवर्तक आचार्य तुलसी
    मुम्बई-टाईगर

     
  15. पं.डी.के.शर्मा"वत्स" on November 1, 2009 at 11:50 PM

    बिल्कुल खरी बात....इसी बहाने कुछ तकनीकी ज्ञान मिल सकेगा ।

     
  16. राज भाटिय़ा on November 2, 2009 at 12:51 AM

    मुझे तो ताऊ का भाई ही लगता है कोई... राम राम

     
  17. Babli on November 2, 2009 at 6:32 AM

    बहुत ही सुंदर और सही बात का ज़िक्र किया है आपने! बढ़िया पोस्ट!

     
  18. बी एस पाबला on November 2, 2009 at 6:56 AM

    बात सही है!
    अब टेम्प्लेट चर्चा का समय आ रहा।

    बी एस पाबला

     
  19. पी.सी.गोदियाल on November 2, 2009 at 9:13 AM

    सर्वप्रथम सभी ब्लोगर मित्रो को गुरुनानक जयंती की हार्दिक शुभकामनाये !
    वाहे गुरु सतनाम, सतनाम वाहे गुरु !

    बहुत खूब, बांटने से ज्ञान बढ़ता ही है !

     
  20. Ratan Singh Shekhawat on November 3, 2009 at 6:44 PM

    पंकज जी उस टेम्पलेट पर राइट क्लिक डिसएबल किया हुआ अतः कोई सोर्स कोड नहीं देख सकता लेकिन फायर फॉक्स में view में जाकर page source पर क्लिक करे या जो पेज आपने खोल रखा है उस पर ctrl+u बटन दबायें उस पेज के सोर्स कोड दिखाई दे जायेंगे और उनमे टेम्पलेट बनाने वाले का लिंक भी मिल जायेगा |

     
  21. शरद कोकास on November 4, 2009 at 3:33 AM

    बबुआ का ब्लॉग ..यह नाम कैसा रहेगा ?

     
  22. Nirmla Kapila on November 4, 2009 at 9:44 AM

    ांआज बस हाजरी शुभकामनायें

     
  23. samaj.darshanindia.blogspot.com on November 4, 2009 at 2:46 PM

    bhai gyan batne se kam to kam to hota nahi aur chachcha agar gyan nahi bate ge to mujh jai se gawar k gawar hi rah jae ge. pankaj ji behtrin sujhaw badhai.

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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