अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

सच्चा प्यार

by Mishra Pankaj | 4:02 PM in , , |

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3 comments:

  1. दिगम्बर नासवा on July 31, 2009 at 7:09 PM

    लाजवाब लिखा है ....इसी लिए तो कहते हैं प्यार अंधा होता है......

     
  2. ताऊ रामपुरिया on July 31, 2009 at 9:23 PM

    ओह..मार्मिक.

    रामराम.

     
  3. Babli on August 3, 2009 at 6:30 AM

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और सुंदर टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
    मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! अब तो मैं आपका फोल्लोवेर बन गई हूँ इसलिए आती रहूंगी!मेरे ब्लोगों पर भी आपका स्वागत है!

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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