अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

इस आश्चर्यजनक विडियो को देखिये किस तरह परछाई के द्वारा कई चित्र तैयार किया जा रहा है




2 comments:

  1. ताऊ रामपुरिया on July 28, 2009 at 7:46 PM

    वाह.. आश्चर्य जनक और अदभुत. धन्यवाद.

     
  2. Science Bloggers Association on July 29, 2009 at 5:17 PM

    वीडियो को साझा करने के लिए आभार।

    कृपया अपने ब्‍लॉग की हेडिंग सही कर लें। सही शब्‍द 'रिश्‍तों' होगा।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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