अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

दोस्ती !!!

by Mishra Pankaj | 2:14 PM in |

दोस्ती !!!

जहरीले दोस्तों और विषाक्त दोस्ती नहीं .
दोस्ती तुम्हारे लिए अच्छा है. कैसे विषाक्त दोस्तों को पहचान करने के लिए।

2 comments:

  1. ताऊ रामपुरिया on July 21, 2009 at 2:34 PM

    सही कहा..यह पहचान जरुरी है.

    रामराम.

     
  2. ओम आर्य on July 21, 2009 at 6:12 PM

    bahut hi sahee hai...

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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