अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

by Mishra Pankaj | 3:19 AM in |

नमस्कार , बोदूराम के साथ पंकज मिश्रा आपके साथ !
बोदूराम थाणे में पहुच जाते है रपट लिखवाने ,,,,,,थानेदार साहब हैरान परेशान बोदूराम से पूछते है .....हां भाई बोदूराम बताओ के तकलीफ आन पडी तुम्हे ?
बोदूराम - का बताये हुजुर आज पाच दिन से लगातार धमकी मिल रही है कि काट देगे .....
थानेदार - कौन है जो तुम्हे इस तरह की धमकी दे रहा है ?
बोदूराम - थानेदार साहब अगर आप कारवाई करो तो बताये नहीं तो बताने से कुछ फ़ायदा नहीं है !
थानेदार - अरे बोदूराम तुम बताओ तो सही हम तुरत फुरत कारवाई करेगे ...
बोदूराम - साहब धमकी बी एस एन एल वालो की तरफ से मिल रहे है.. कह रहे है कि बिल जमा कर दो नहीं तो काट देगे ..कनेक्शन !!!!!
************(((((((((((((((((((**************)))))))))))))))***********
बोदूराम - पाच हजार की जरुरत है मना मत करना , जैसे ही पैसा वापस आयेगा सबसे पहले तुम्हारा कर्जा उतारूगा !!
और वो मिन्नत कर रहे थे ए टी एम् मशीन से !!!!!!!!!!!!!!


जल्द ही कई सारे बोदूराम के किस्से के साथ वापस आउगा !! फिलहाल अभी तो नौकरी पानी में जुटा हु!

11 comments:

  1. निर्मला कपिला on May 20, 2010 at 3:41 AM

    bahut din baad bodu ram se mili hoon are kahan raha bodu ram . maine socha pankaj ko kahin uda le gaya. ab bodu se kahana kahin naa jaye. majedar kisse hain bodu ke isaka saath mat chodana shubhakaamanayen

     
  2. Arvind Mishra on May 20, 2010 at 5:19 AM

    मैं देख नहीं पाया या बोदू बहुत दिन बाद दिखे ?

     
  3. पी.सी.गोदियाल on May 20, 2010 at 6:27 AM

    सही कहा मिश्रा जी नौकरी पर ही दीजिये , वो ज्यादा इम्पोर्टेंट है भाई ! ब्लॉग्गिंग के लिए वक्त ही वक्त है आगे !

     
  4. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on May 20, 2010 at 6:37 AM

    ऐसी भी क्या व्यस्तता है!
    बहुत दिनों बाद दिखाई दिये बोदूराम!

     
  5. Udan Tashtari on May 20, 2010 at 7:12 AM

    हा हा!! बताओ बोदूराम की हालत न बदलनी थी और न बदली.

     
  6. Mithilesh dubey on May 20, 2010 at 10:10 AM

    नौकरी में लगे रहिए भईया लेकिन थोड़ा समय इधर भी ।

     
  7. राज भाटिय़ा on May 20, 2010 at 4:14 PM

    बेचारा बोदू राम

     
  8. डॉ. मनोज मिश्र on May 20, 2010 at 6:55 PM

    पहले नौकरी बाकी सब बाद में.

     
  9. दिगम्बर नासवा on May 20, 2010 at 7:18 PM

    बहुत अच्छे मिश्रा जी ...

     
  10. हिमांशु । Himanshu on May 23, 2010 at 5:47 AM

    हम सबका बोदूराम फिर से दिखायी दिया..इतने से खुश हैं हम !

    बहुत दिनों से अनियमितता है पंकज भाई ! शायद दोनों तरफ ।

     
  11. वन्दना अवस्थी दुबे on November 5, 2010 at 7:21 PM

    दीपावली की असीम-अनन्त शुभकामनायें.

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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