अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

मम्मी आज बाल कटवाना है ,
पापा से पैसे दिलवा दो ना ।
हा वो तो ठीक है , पर घर का नाइ है न?
नही ओ अच्छा नही काटता ।
ठीक है पापा को आने दो ,
सुनो जी इसको पैसे दे दो ,
क्यों? बाल कटवाना है ,
तो घर का नाइ है न?
नही बोल रहा है अच्छा नही काटता।
ठीक है पर मन तुम्ही बढ़ा रही हो
छोड़ो कितने दिन कल ओ ख़ुद कमाएगा।
और आज मै खुद कमा रहा हु मगर ।?
यार बाल बढ गया है कटवाना है ,
सामने से स्टुडेंट फ्रेंड की आवाज
अरे भाई फला सैलून में जाओ ,
क्या मस्त स्टाइल में बाल काटता है ।
लोग १० दिन पहले टोकन लेते है,
ओ तो सही है पैसा कितना लेता है ,
ज्यादा नही १०० रुपये ,
छोड़ो यार पास में पीपल के पेड़ के नीचे के नाइ से कटवा लूगा ,
मेरे गाँव का नाइ तो फ्री में काटता था,
हा लेकिन अब यहाँ माँ नही है ना की पापा से पैसे दिलवा देगी और मै मस्त स्टाइल सैलून में जाके बाल कट्वाऊ ॥
माँ तुम्हे सादर चरण स्पर्श ।

1 comments:

  1. चंदन कुमार झा on October 8, 2009 at 8:59 PM

    बाल कटवाने की लीला भी अपरमपार है ।

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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