अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

नमस्कार ,
मै पंकज मिश्रा , आप सबको दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाए ..........
दीपावली आ रही है ,.... समझिये आ ही गयी है , जहा देखिये पटाखे ,बजाये जा रहे है , फ़ुल्झडिया छोडी जा रही , आसमान धुन्ध्मान और वातावरणशोरमय  बनाया जा रहा है .....


सड़क पर सवारियों के ऊपर पटाखे फेके जा रहे है ......गावो में अभी से राकेट छोडने से आग लगना शुरू हो गया है अब आग लगेगा तो घर जलेगा , घर जलेगा तो लड़ाई होगी तो ये कौन से और कैसी दीपावली ......
कभी आपने सोचा है कि आप दीपावाली को कितने पैसे का पटाखा फोड़ते है और उससे हासील क्या होता है .... चंद जोरदार आवाजे ढेर सारा धुँआ और कितनी बात बच्चे तो बच्चे खुद भी आप इसके लपेट में आकर जल  जाते है... किसी केहाथ में फुटका पड़ जाता है तो किसी की आँख कानी होने की नौबत आ जाती है ... ऐसे माहौल में जानबूझकर इस चक्कर में मत आइये और बच्चो के लिए भी सादा दो चार पटाखे ले लीजिये लेकिन ज्यादा पैसा और ज्यादा रिस्क मत लीजिये ...
जैसा कि सब को पता है दीपावली का त्यौहार लक्ष्मी गणेश जी की पूजा के लिए किया जाता है तो पूजा में आवाज और बम पटाखे क्यों ?


क्यों हम जानबूझकर अपने बच्चो को आग से खेलने देते है ?
क्या हासील कर सकते है आप चंद नकली राकेट आसमान में छोड़कर ?
क्या आप के  ज्यादा  आवाज वाले पटाखे बजाने से लक्ष्मी जी खुश होती है ?
आप सब से अनुरोध है कि शांत और शभ्य तरीके से इस त्यौहार को मनाये .........


पंकज मिश्रा 

सच्चा प्यार

by Mishra Pankaj | 4:02 PM in , , | comments (3)

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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