अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी



आज सुबह-सुबह जब ऑफिस के लिए निकला तो घड़ी में आठ बजकर पॉँच मिनट हो चुके थे
मेरी ट्रेन सुबह आठ बजकर दस मिनट की है और रूम से स्टेशन का रास्ता सात सौ मीटर का हैवैसे तो मै टाइम से निकलता हु लेकिन आज तबियत कुछ नरम होने के नाते देर हो गयी

मै भागा भागा स्टेशन की तरफ़ जा रहा था कि सामने से एक लड़का लगभग बीस साल का मोटर साकइल लेकर रहा था और सायद पीछे अपनी महबूबा को बैठा रखा था ( ऐसा उन दोनों के ब्यवहार से लग रहा था ) ने मेरे पास आते आते अपने गाडी की स्पीड बढ़ा ली
मै किसी तरह पानी में पैंट को हाथ से ऊपर उठाकर उस सड़क को पार करना चाहता था लेकिन उस लडके ने पानी में महबूबा के साथ मस्ती करने के चक्कर में सड़क का सारा कीचड़ युक्त पानी मेरे ऊपर उडाते हुए फर्राटे के साथ निकल गया

मै बस उन दोनों को देखता रह गया बेबसी के साथ

लेकिन अगले ही पल कुछ दूरी पर वो दोनों भी संतुलन बनाये रखने के कारण गिर पड़े

काश !अगर कही वो दोनों अपना मानसिक संतुलन बनाए रखते तो तो वो गिरते और ही मेरी ट्रेन छुटती !!!


खैर छोडिये आप देखीये ये एकदम प्यारा विडियो और मुझे भरोसा है आप हसते हसते लोट पोत हो जायेगे








Followers

About Me

My photo
साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
विजेट आपके ब्लॉग पर