अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी



हमारे गृह जनपद जौनपुर में एक ऐसा मंदिर है जहा के पूरे बारह गावों के लोग कभी भी सांप के काटने से नही डरते है क्युकि उनके ऊपर साप के बिष का असर नही होता है।

और इस मंदिर का प्रसाद बारह गावों की पुत्रियों और भान्जीयों को खाना मना है।
ऐसी धारणा है की अगर किसी कन्या ने इस
मंदिर का प्रासाद खाया तो उसको आजीवन बिधवा रहना पडेगा उसका पति मर जाएगा ।

बात है जौनपुर जनपद रामनगर ब्लाक मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित अहिरौली गांव जहां एक बड़े तालाब के किनारे लौहारदेव का मन्दिर है । वर्ष 2003 में इस मन्दिर को बनवाने के लिए नींव की खुदाई हो रही थी जहां सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे और उनकी प्रबल इच्छा हुई कि लौहारदेव दर्शन दें। लोगों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब थोड़ी देर में सर्प रूप में चबूतरे पर आकर लौहार देव ने ग्रामीणों को दर्शन दिया। उनकी मूर्ति पहले नाग रूप में चबूतरे पर स्थापित थी जहां आज भी सैकड़ों वर्ष पुराना बरगद का विशाल पेड़ मौजूद है।

ऐसा मान्यता है कि लोहार देव उस मंदीर के आस पास रह रहे दुबे परिवार के कुल देवता है । कहाजाता है कि बहुत सम
य पहले वहा एक दुबेपरिवार रहता था जिसके छ पुत्र थे । जब इनकी माँ सबके लिए खाना लगती तो वहा अपने आप एक भोजन की थाली और लग जाती थी । इससमस्या को हल करने के लिए बनारस से एक प्रकांड पंडित जी बुलवाए गए । आह्वान करने पर लौहारदेव प्रकट हुए और कहा कि मैं इनका सातवां पुत्र हूं।

एक किंवदन्ती के अनुसार इन सातों भाइयों की एक बहन थी। एक बार रक्षाबन्धन के दिन उसने कहा कि सभी भाई तो राखी बांधने पर कुछ उपहार जरूर देंगे लेकिन सातवां जो आधा मानव व आधा सर्प था वह क्या देगा। इस पर उन्होंने कहा कि बहन राखी बांधने के बाद तुम मेरी पूंछ का एक इंच भाग
काट लेना तो सोना हो जायेगा। लालच में आकर बहन ने पूंछ का कुछ ज्यादा भाग काट लिया। इस दौरान रक्तस्त्राव होने पर पीड़ा होने के कारण श्राप दिया यहां मेरा एक मंदिर तो भविष्य में बनेगा लेकिन उनके खानदान के विस्तार के बाद भी कोई पुत्री उनका प्रसाद नहीं खा सकेगी। यदि ऐसा हुआ तो उसे विधवा का जीवन व्यतीत करना पड़ेगा।

अब इस कहानी में कितनी सच्चाई है ये तो किसी को नही पता लेकिन वहा के लोग आज भी अपने पुत्रियों को मंदिर में जाने से मना करते है ।
















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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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